
नई दिल्ली, 24 नवंबर, 2025: जस्टिस सूर्यकांत आज यानी सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेंगे। हरियाणा के हिसार जिले की साधारण पृष्ठभूमि से आए जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने का होगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जज रहते हुए कई ऐतिहासिक संवैधानिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है। वह उस पीठ का हिस्सा थे जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा और राजद्रोह कानून (धारा 124ए) को प्रभावी रूप से निलंबित कर दिया, जिसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़ा कदम माना गया।
पेगासस और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सख्त टिप्पणी
जस्टिस सूर्यकांत ने पेगासस निगरानी के आरोपों की सुनवाई करने वाली पीठ में भी शामिल थे, जिसने दावों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की समिति नियुक्त की थी। सुनवाई के दौरान, अदालत ने यह सख्त टिप्पणी की थी कि राज्य को “राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर खुली छूट” नहीं दी जा सकती है। इसके अलावा, उन्होंने एक रैंक-एक पेंशन (ओआरओपी) योजना को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2022 की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक की जांच के लिए पैनल नियुक्त करने वाली पीठ में भी थे।
लैंगिक न्याय और पारदर्शिता पर दिया जोर
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने लैंगिक न्याय के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। पारदर्शिता पर जोर देते हुए, उन्होंने चुनाव आयोग से विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बिहार की मसौदा सूची से हटाए गए 65 लाख मतदाताओं का विवरण प्रकट करने को भी कहा।
