प्रमोद व्यास
उज्जैन: धार्मिक राजधानी अवंतिका में सिंहस्थ 2028 के पहले सीवरेज प्रोजेक्ट को पूरा करके स्थानीय और बाहरी नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराई जाने के उद्देश्य पर टाटा कंपनी ने जो पलीता लगाया, उस पर अधिकारियों ने एक्शन लिया और कार्रवाई करते हुए ब्लैकलिस्टेड कर दिया, बावजूद बचा हुआ प्रोजेक्ट कंपनी पूरा करेगी.
नगर निगम प्रशासन ने विकास कार्यों में लापरवाही और निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन करने पर कड़ा रुख अपनाया है. निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मुंबई को अगले तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड करने का आदेश गुरुवार को जारी किया, इस आदेश के बाद अब यह कंपनी मध्य प्रदेश में किसी भी सरकारी विभाग के साथ भविष्य में कोई काम नहीं कर पाएगी.
शहर में भ्रांति, ब्लैकलिस्टिंग के बाद भी काम क्यों?
टाटा प्रोजेक्ट्स को ब्लैकलिस्ट करने की खबर सामने आते ही शहर के लोगों में यह भ्रांति फैल गई कि अगर कंपनी काली सूची में डाल दी गई है, तो वह चल रहे काम को कैसे जारी रख सकती है.
नवभारत की विशेष पड़ताल
नवभारत ने टाटा कंसल्टेंट के नोडल अधिकारियों और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों से चर्चा की. जानकारी सामने आई कि टाटा कंपनी को भले ही ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया हो, बावजूद यह आदेश केवल भविष्य के नए कार्यों पर लागू होता है. उज्जैन सहित मध्य प्रदेश में टाटा कंपनी 3 साल तक काम नहीं कर पाएगी.
अधूरा कार्य करेगी पूरा
सीवरेज प्रोजेक्ट के अधूरे काम को पूरा करने के लिए कंपनी को टर्मिनेट नहीं किया गया है, बल्कि बचा हुआ काम उसी से कराया जाएगा ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके. नगर निगम और टाटा कंसल्टेंट के अधिकारियों ने बताया कि जनता को लगातार हो रही परेशानी से निजात मिले इसके लिए बचे हुए काम को तीव्र गति से किया जा रहा है.
टाटा के आने और ब्लैकलिस्टेड तक की कहानी
नगर निगम ने शहर की सीवरेज व्यवस्था बेहतर बनाने के उद्देश्य से टाटा को 2017 में कार्य आदेश जारी किया था. इसके लिए डेडलाइन तय भी की, कंपनी को नवंबर 2019 तक कार्य पूर्ण करके निगम को सौंपना था. कई रिमाइंडर और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद, कंपनी ने काम की रफ्तार तेज करने में घोर लापरवाही बरती. नवम्बर 2019 की समय सीमा निकल जाने और वर्ष 2025 आ जाने के बाद भी काम पूरा नही हुआ, बार-बार नोटिस देने पर भी गति न बढ़ाने और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में बाधा डालने के गंभीर आरोपों के चलते टाटा कंपनी को बीते गुरुवार को 3 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया.
सिंहस्थ की तैयारियों पर असर
टाटा की धीमी गति का सबसे गंभीर असर सिंहस्थ 2028 के तहत चल रहे विकास कार्यों पर पड़ रहा है. सीवरेज का काम पूरा न होने से सड़क चौड़ीकरण और अन्य महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कई स्थानों पर रुके हुए हैं, जो सिंहस्थ की तैयारियों में बड़ी रुकावट पैदा कर रहा है.
चेतावनी रही बेअसर
25 अक्टूबर 2025 को संभागीय आयुक्त आशीष सिंह, जिला कलेक्टर रोशन सिंह और निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने साइट का संयुक्त निरीक्षण किया था. संयुक्त निरीक्षण के बाद कंपनी को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. कंपनी को 10 नवंबर 2025 तक प्रतिदिन 305 से अधिक हाउस सर्विस कनेक्शन और 500 मीटर पाइप बिछाने का लक्ष्य दिया गया था. कंपनी इस लक्ष्य को भी पूरा करने में विफल रही.
क्या है बचा हुआ काम?
टाटा कंपनी सीवरेज प्रोजेक्ट का लगभग 7 किलोमीटर का काम कर रही है, जो मुख्य रूप से महाकाल मंदिर और गोपाल मंदिर क्षेत्र से संबंधित है. कुल हाउस होल्ड कनेक्शन लक्ष्य 44,000 बताया गया है, अब तक किए गए 1,500 कनेक्शन कर दिए है. 42,500 कनेक्शन टाटा कंपनी को पूरे करने हैं।
अफसरों ने स्वीकारा, टाटा करेगी काम
नवभारत से चर्चा में कंसल्टेंट प्रतीक कुमार एवं इंजीनियर आशीष जैन ने बताया कि नगर निगम ने भले ही कंपनी ब्लैकलिस्टेड किया है, बावजूद शहर के महत्वपूर्ण सीवरेज प्रोजेक्ट का बचा हुआ काम वह पूरा करेगी, ताकि विकास कार्य आगे बढ़ सकें. ब्लैकलिस्टेड के निर्णय और आदेश से कंपनी की वर्तमान गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा. सीवरेज का बचा हुआ काम कंपनी पूरा करेगी.
