
टीकमगढ़।शहर के महेंद्र सागर तालाब से वृंदावन तालाब को जोड़ने वाली बंडा नहर वाला नाला अब गंदे नाले का रूप ले चुकी है। लगभग पांच महीने पहले नगर पालिका ने नहर की सफ ाई और पक्का निर्माण, फु टपाथ, लाइटिंग व सौंदर्यीकरण का आश्वासन दिया था जिसके लिए लोगों ने स्वयं अपने अतिक्रमण तक हटा लिए थे। लेकिन महीनों बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है जिससे स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नहर खुली रहने से कई घरों का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। सरिता झा ने बताया कि उनके घर के सामने नहर खुली होने से आवागमन मुश्किल हो गया है। मजबूरी में उन्होंने दो लोहे के गाटर और लकड़ी के पटिए लगाकर एक अस्थायी पुल बनाया है जिसके लिए उन्हें किराया देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका ने 15 दिन में निर्माण शुरू करने का भरोसा दिया था लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। लोगों ने बताया कि उनके पड़ोसी दीनदयाल झा को पैरालिसिस अटैक आया है और उन्हें अस्पताल ले जाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होता है। मोहल्ले के लगभग 25 से 30 परिवार इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
बारिश के मौसम से पहले जिला प्रशासन ने बंडा नहर की सफाई कराई थी और अंबेडकर चौराहा से खादी आश्रम तक नहर पर बने अतिक्रमण हटाए गए थे। लोगों ने प्रशासन का साथ देते हुए खुद ही अपने निर्माण हटाए थे मगर इसके बाद नहर की मरम्मत का काम शुरू ही नहीं हुआ। स्थानीय निवासी शांतनु श्रीवास्तव ने बताया कि नहर महीनों से खुली पड़ी है जिससे बदबू कीचड़ और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। छोटे बच्चों और मवेशियों के नहर में गिरने का खतरा बना रहता है। कई बार जहरीले कीड़े और सांप भी नहर के रास्ते घरों में पहुंच जाते हैं। जिससे लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। मोहल्लेवासियों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए वे पहले ही ज्ञापन दे चुके हैं। यदि जल्द ही बंडा नहर की मरम्मत शुरू नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
शांतनु श्रीवास्तव ने बताया कि नहर महीनों से खुली पड़ी है जिससे बदबू कीचड़ और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। छोटे बच्चों और मवेशियों के नहर में गिरने का खतरा बना रहता है। कई बार जहरीले कीड़े और सांप भी नहर के रास्ते घरों में पहुंच जाते हैं। जिससे लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। मोहल्लेवासियों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए वे पहले ही ज्ञापन दे चुके हैं।
