
भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभागार में सोमवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने लैंड पूलिंग एक्ट और किसानों से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार को कड़े शब्दों में घेरा। इस दौरान उपाध्यक्ष (संगठन) एवं पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे, विधायक महेश परमार, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह चौहान, प्रदेश महामंत्री एवं उज्जैन जिला प्रभारी अमित शर्मा, उज्जैन शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी तथा प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज उपस्थित रहे।
विधायक महेश परमार ने उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट की वापसी को किसानों की “ऐतिहासिक जीत” बताया। उनका कहना था कि यह एक्ट क्षेत्र के करीब 19 गांवों की जमीन बिना उचित मुआवज़े और बिना सहमति के अधिग्रहित करने का प्रयास था। लगातार आंदोलनों, जनजागरण, विरोध-प्रदर्शनों और विधानसभा में उठाए गए सवालों के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा। परमार ने इसे केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानून वापस लेने जैसी स्थिति बताया।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के दौरान इस एक्ट को विधिवत वापस क्यों नहीं कराया गया। क्या इसकी वापसी सिर्फ उज्जैन तक सीमित है या पूरे प्रदेश के लिए लागू होगी? साथ ही उन्होंने मांग की कि क्या यूपीए सरकार द्वारा लागू चार गुना मुआवज़े का प्रावधान पुनः बहाल किया जाएगा।
पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने भाजपा सरकार पर उद्योगपतियों के हित में किसान विरोधी नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाया। धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने कांग्रेस की किसान हितैषी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा किसानों की लड़ाई मजबूती से लड़ी है।
अमित शर्मा और मुकेश भाटी ने किसानों के संघर्ष की जानकारी देते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान किसानों को डराने-धमकाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन उनकी एकजुटता ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया।
प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने सरकार से चार सीधे सवाल पूछे—मुआवज़े, टी एंड सीपी एक्ट संशोधनों, फसल खरीदी नीति और सोयाबीन किसानों को मिले वास्तविक लाभ पर स्पष्टीकरण की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उज्जैन के किसानों की जीत, पूरे मध्य प्रदेश के किसानों की जीत है।
