ग्वालियर में उगेगा रंगीन आलू, मिट्टी में दोगुना, एयरोपोनिक्स तकनीक से 100 गुना उत्पादन

ग्वालियर: ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय में आलू की रंगीन किस्मों पर काम किया जा रहा है। यहां स्थापित जीन बैंक में बैंगनी आलू की वैराइटी को तैयार किया गया है। जिसके जीन विश्वविद्यालय ने शिमला से मंगाए हैं। अब इन जीन पर स्टडी कर बीज तैयार किए जा रहे हैं। जो पोषक तत्वों से भरपूर होंगे और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएंगे।

इस आलू के जीन अभी जीन बैंक में संरक्षित किए गए हैं। इन्हें एयरोपोनिक्स तकनीक यानि बिना मिट्टी के हवा में उगाया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए नए बीज तैयार किए जा रहे हैं। विवि कैंपस में जमीन में भी पैदावार की गई है। इसके बाद इन बीजों को किसानों को दिया जाएगा, जो इन पोषक तत्वों से भरपूर आलुओं का उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।

एंटीऑक्सीडेंट और आयरन इसमें ज्यादा होता है, आस्ट्रेलिया में ज्यादा पैदावर जैव प्रौद्योगिकी केंद्र प्रभारी व वैज्ञानिक सुषमा तिवारी के अनुसार, यह आलू बाहर से और अंदर से बैंगनी रंग का होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और आयरन जैसे पोषक तत्व सामान्य आलू की तुलना में कई गुना अधिक होते हैं। यह किस्म ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा पाई जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तनाव कम करने में मदद करता है और आयरन खून की कमी पूरा करने में सहायक है।

अभी तक आलू की फसल ग्वालियर-चंबल अंचल में नहीं की गई है। जीन बैंक से बीज तैयार होने के बाद इसकी फसल यहां भी होने लगेगी।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि यह बीज पूरी तरह वायरस फ्री होता है। इसका फायदा यह है कि लंबे समय तक फसल में बीमारी नहीं लगती और उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। जहां सामान्य आलू का 1 किलो बीज 10 किलो पैदा करता है।

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