अलीराजपुर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अलीराजपुर जिले में आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में जनजातीय वीरों के बलिदान, परंपरा और संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि अंग्रेजों की तोप और बंदूक के सामने तीर-धनुष से लड़ने वाला यह समाज अदम्य साहस का प्रतीक है। उन्होंने मंच से जनजातीय कारीगरों द्वारा बनाए गए विशेष जैकेट की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे परंपरा व कौशल का अनूठा उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलीराजपुर प्रकृति की अनमोल देन है,घने जंगल, कल-कल करती नदियाँ, झरने, पहाड़ियाँ और इनके बीच ताड़ी के पेड़ का अपना अलग ही आनंद है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने जल-जंगल-जमीन पर अन्याय किया, खून की नदियाँ बहाईं, गरीबी थोप दी तथा भगवान बिरसा मुंडा को ज़हर देकर हत्या की और टंट्या मामा को फाँसी दी।
उन्होंने झाबुआ-अलीराजपुर अंचल के वीर योद्धा छीतू किराड़े जी के बलिदान को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 7,000 लोगों की फौज बनाकर अंग्रेजों से भीषण संघर्ष किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्रतिमा का अनावरण कर प्रदेश सरकार ने उनके गौरवशाली इतिहास को जीवंत किया है।विपक्ष पर निशाना साधते हुए डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने आदिवासी अंचल को केवल वोट बैंक समझा, और हमारे नायकों के इतिहास को सामने नहीं आने दिया। “हम जब अपने नायकों की जयंती मनाते हैं, तो वही हमारे लिए दिवाली, दशहरा और भगोरिया का आनंद होता है,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में 250 करोड़ रुपये की लागत से 156 से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया। साथ ही उड़द और सोयाबीन में पीला मोजैक व कीट रोग से प्रभावित किसानों को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने 45 करोड़ रुपये के मुआवज़े की घोषणा भी की।
