बेलेम, 14 नवंबर (वार्ता) ब्राज़ील के बेलेम शहर में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने जलवायु आपदाओं के कारण होने वाले विस्थापन के मसले को जलवायु अनुकूलन योजनाओं में शामिल किये जाने पर ज़ोर दिया है।
दुनिया भर के अनेक क्षेत्रों में बाढ़, प्रचंड लहरों, सूखा और तूफ़ान के कारण हर साल करोड़ों लोगों को अपना घर छोड़ कर विस्थापित होना पड़ता है। इनमें से बहुत से लोग देश के भीतर ही रहते हैं, मगर फिर अपनी जड़ों से दूर और बेघर रहते हैं।
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि वो समय शायद अधिक दूर नहीं जब समुद्रों के बढ़ते जल स्तर से देश ही डूब जाएंगे या फिर असहनीय सूखा स्थिति के कारण रहने योग्य ही नहीं बच पाएंगे।
आईओएम की उप महानिदेशक उगोची डैनियल्स ने गुरूवार को कहा कि जो लोग और समुदाय अपने स्थानों पर बसे रहने का निर्णय लेते हैं उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए और जो लोग एवं समुदाय अपने स्थान बदलने का फ़ैसला करते हैं उन्हें गरिमा के साथ ऐसा करने का विकल्प मिलना चाहिये।
सुश्री डैनियल्स ने उम्मीद जतायी कि कॉप-30 सम्मेलन एक ऐसा परिवर्तनकारी पड़ाव बन सकेगा जो मानव विस्थापन को जलवायु कार्रवाई में प्रमुख स्थान देगा। उन्होंने कहा, “कॉप-30 सम्मेलन में बदलती पृथ्वी के साथ तालमेल बिठाने के मुद्दे पर चर्चा हो रही है। विस्थापित लोग दुनिया को याद दिला रहे हैं कि जलवायु कार्रवाई केवल पारिस्थितिकियों का संरक्षण करने तक सीमित नहीं है। यह लोगों के जीवन की रक्षा करने, गरिमा को बरकरार रखने और प्रगति की दौड़ में सभी को साथ रखने पर जोर देती है।

