
ग्वालियर। जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति पर विपरीत प्रभाव डालने वाले सभी प्रकार के कृत्य अब प्रतिबंधित रहेंगे। जिला दण्डाधिकारी रुचिका चौहान ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत नया प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसका उल्लंघन बीएनएस की धारा 223 के तहत दंडनीय माना जाएगा।
नया आदेश, 10 अक्टूबर 2025 को जारी पूर्व प्रतिबंधात्मक आदेश को यथावत रखते हुए जारी किया गया है। इसमें यह जोड़ा गया है कि कोई भी व्यक्ति या समूह ऐसा कार्य नहीं करेगा जिससे जिले की कानून व्यवस्था, लोक शांति या सामाजिक सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
*मीडिया को भी जारी हुआ विशेष निर्देश*
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की युगल पीठ द्वारा याचिका क्रमांक WP/44524/2025 में पारित आदेश के अनुपालन में, जिला दण्डाधिकारी ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, विशेषकर ग्वालियर की स्थानीय मीडिया को निर्देश जारी किए हैं कि 16 नवम्बर 2025 के आह्वान एवं उससे संबंधित विषयों पर अगली सुनवाई तक कोई समाचार प्रकाशित या प्रसारित न किया जाए।
*आदेश का उद्देश्य – लोक शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना*
जिला दण्डाधिकारी चौहान ने आदेश में उल्लेख किया है कि जिले में हाल के दिनों में बिना अनुमति धरना, प्रदर्शन और रैली निकालने के प्रयास किए गए हैं। साथ ही, भविष्य में भी ऐसे आह्वानों की जानकारी प्राप्त हो रही है, जो लोक शांति और कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, नया प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।
*10 अक्टूबर का आदेश भी रहेगा प्रभावी*
ज्ञात हो कि 10 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश के तहत ग्वालियर जिले की सीमाओं के भीतर बिना सक्षम अनुमति के धरना, प्रदर्शन, रैली, जुलूस या चल समारोह पूरी तरह प्रतिबंधित किए गए थे। इसके साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे फेसबुक, वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, एक्स आदि) पर भड़काऊ, भ्रामक या साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट अपलोड या फॉरवर्ड करना भी निषिद्ध किया गया था। उसी आदेश के तहत किसी धर्म, जाति, समुदाय या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नारे, लेखन, बैनर, पोस्टर या होर्डिंग लगाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।
