
जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने हरदा जिले का न्यायिक क्षेत्राधिकार जबलपुर से पृथक कर इंदौर बेंच को दिए जाने का प्रस्ताव किया है। इसकी जानकारी लगते ही जबलपुर के अधिवक्ता संघ आक्रोशित हो गए हैं। उन्होंने विरोध दर्ज कराया है। गुरुवार को इस सिलसिले में हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार, हाईकोर्ट बार, जिला बार, एमपी स्टेट बार व सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के पदाधिकारियों की आपात संयुक्त बैठक आहूत हुई।
जिसमें हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन, सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल की अध्यक्ष शोभा मेनन, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा, स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राधेलाल गुप्ता सहित सदस्य मनीष दत्त, शैलेंद्र वर्मा, अहादुल्लाह उस्मानी सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रतिवाद किया। साथ ही निर्णय लिया कि शुक्रवार को इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा को लिखित आपत्ति दी जाएगी। जबलपुर के सांसद, विधायक व महापौर से इस प्रस्ताव का विरोध करने हेतु अनुरोध किया जाएगा। समस्त अधिवक्ता संगठन एकजुट होकर संबंधित सभी विभागों एवं अधिकारियों को संयुक्त हस्ताक्षरित प्रतिवेदन सौंपेंगे। संयुक्त बैठक में विगत वर्षों में जबलपुर के साथ किए गए सौतेले व्यवहार व उसके वैध अधिकारों से वंचित किए जाने के विषय पर भी चर्चा हुई। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि यदि वर्तमान प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाता है, तो जबलपुर के अधिवक्ता समुदाय एवं अन्य संगठनों के साथ मिलकर आंदोलनात्मक रणनीति अपनाई जाएगी। बैठक में हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष देवेंद्र गंगराड़े, लाइब्रेरी सेक्रेटरी आनंद नायक, कार्यकारिणी सदस्य अक्षय पवार, स्वाति, अधिवक्ता असीम जॉर्ज, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित जैन, सहसचिव योगेश सोनी, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह तथा जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी व सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। राज्याधिवक्ता परिषद के सदस्य मृगेंद्र सिंह और मनीष तिवारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। सभी उपस्थित अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जबलपुर का अधिकार दिला कर रहेंगे और उसके हक को किसी भी स्थिति में जाने नहीं देंगे।
