जबलपुर: हाईकोर्ट की पहल पर सिविल सर्विस की तैयारी कर रही युवती अपने पिता के साथ रहने के लिए तैयार हो गयी। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने पिता के द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए युवती के संरक्षण के संबंध में आदेश जारी किये है।
गौरतलब है कि भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र निवासी एक पिता की तरफ से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
जिसमें कहा गया कि उन्होंने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों गुजर जाने के बावजूद भी पुलिस उसे तलाश नहीं कर पाई है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए पुलिस को युवती की तलाश करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश करने के आदेश जारी किये थे। पुलिस ने इंदौर से उसे 10 महीने बाद बरामद किया तो पता चला कि वह किराए पर रहते हुए एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है।
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में उपस्थित युवती ने युगलपीठ को बताया था कि उसके पिता उसे पढ़ाई नहीं करने दे रहे थे और शादी का दबाव बना रहे थे। उनकी प्रताड़ना से परेशान होकर वह घर से निकल गई और इंदौर में एक निजी कंपनी में नौकरी करके अपना खर्च निकालने लगी। वह सिविल सर्विस की तैयारी के लिए कोचिंग कर रही है। वह सिविल सर्विसेज में जाने का सपना संजोए हुए मेहनत कर रही है। युवती ने पिता के साथ नहीं भेजने की गुहार लगाई।
पिता की तरफ से युगलपीठ को आष्वासन दिया गया था कि वह अपनी बेटी को प्रताड़ित नहीं करेंगा। पिता ने युगलपीठ से बेटी को घर भेजने का आग्रह किया। जिसके बाद न्यायालय ने युवती को कहा कि वह चार-पांच दिनों तक अभिभावक के साथ रहकर देखे। अगर माहौल बेहतर नहीं लगे तो कलेक्टर को आदेश देंगे कि वह उसकी बाहर रहने और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था करायेंगे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युवती अपने पिता के साथ रहने के लिए तैयार हो गयी। युगलपीठ ने युवती को भविष्य को मद्देजनर रखते हुए उसके संरक्षण के संबंध में आदेश पारित करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दीपक कुमार रघुवंशी ने पैरवी की
