जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष एक युवती ने कहा कि उसके पिता उसे पढ़ाई नहीं करने दे रहे थे और शादी का दबाव बना रहे थे। इसके लिए उसे प्रताडि़त किया जा रहा था। परेशान होकर वह घर से निकल गई और इंदौर में एक निजी कंपनी में नौकरी करके अपना खर्च निकालने लगी। वहीं सिविल सर्विस की तैयारी के लिए कोचिंग करने लगी।
युवती ने पिता के साथ नहीं भेजने की गुहार लगाई। वहीं, पिता ने उसे फिर से प्रताडि़त नहीं करने का आश्वासन देकर घर भेजने का आग्रह किया। जिसके बाद न्यायालय ने युवती को कहा कि वह चार-पांच दिनों तक अभिभावक के साथ रहकर देखे। अगर माहौल बेहतर लगे तो ठीक नहीं तो कलेक्टर को आदेश देंगे कि वह बाहर रहने और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था कराएं। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी
दरअसल भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र निवासी एक पिता की ओर से यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। जिसमें कहा गया कि उन्होंने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। न्यायालय ने मामले की पूर्व में सुनवाई करते हुए पुलिस को युवती का पता लगाने के निर्देश दिये थे।
पुलिस ने इंदौर से उसे 10 महीने बाद बरामद किया, तब पता चला कि वह किराए पर रहते हुए एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी है। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती को पेश किया था। न्यायालय के पूछने पर युवती ने पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया। उसने न्यायालय को बताया कि पिता उसे आगे नहीं पढ़ाना चाहते। जबकि वह सिविल सर्विसेज में जाने का सपना संजोए हुए मेहनत कर रही है। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई कल 12 नवंबर को निर्धारित की है।
