इंदौर: इंदौर-पीथमपुर 75 मीटर चौड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर के जमीन का सीमांकन प्राथमिकता से कराया जाए. साथ ही पीथमपुर सेक्टर-7, बरलाई शुगर मिल से जुड़े लंबित प्रकरणों , आईटी पार्क-3, आईटी पार्क-4 एवं प्लग-एंड-प्ले पार्क प्रगति की समीक्षा भी की गई. विशेष बात यह है कि कलेक्टर कमिश्नर कांफ्रेंस में एमपीआईडीसी के जमीन और विकास कार्यों को लेकर मुद्दा उठा था.
इसके बाद आज कलेक्टर शिवम वर्मा ने एमपीआईडीसी कार्यालय में समीक्षा बैठक ली. समीक्षा के दौरान एमपीआईडीसी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हिमांशु प्रजापति ने विभिन्न परियोजनाओं की पीपीटी के माध्यम से रिपोर्ट प्रस्तुत की. उन्होंने बताया कि इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर सिंहस्थ के पहले बनने से उपयोगी सिद्ध होगा क्योंकि उक्त कॉरिडोर एबी रोड से उज्जैन की ओर जाने वाले यातायात को शहर में प्रवेश किए बिना डायवर्ट करने में सहायक होगा.
साथ ही शहर के पश्चिमी हिस्से में विकास को भी गति प्रदान करेगा. कलेक्टर वर्मा ने निर्देश दिए कि कॉरिडोर मार्ग में आने वाली भूमि का सीमांकन प्राथमिकता से किया जाए, विशेषकर 75 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण हेतु आवश्यक भूमि का. उन्होंने कहा कि सीमांकन कार्य कॉरिडोर के दोनों सिरों से एक साथ प्रारंभ किया जाए, ताकि कार्य में गति आ सके तथा भूमि पंजीयन की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जा सके.
औद्योगिक परियोजनाएं समय सीमा में क्रियान्वित करें
पीथमपुर सेक्टर-7 के प्रकरणों पर चर्चा के दौरान प्रजापति ने भूमि सीमांकन एवं लैंड रिकॉर्ड में तीव्रता लाने का आग्रह किया. कलेक्टर वर्मा ने संबंधित राजस्व अधिकारियों निर्देश दिए. बैठक में बताया गया कि वन विभाग से संबंधित वन भूमि विनिमय का प्रकरण प्रगति पर है. इसमें देरी होने से विकास कार्यों में विलंब हो रहा है. बरलाई शुगर मिल की भूमि से संबंधित रिकॉर्ड दर्ज करने की आवश्यकता पर भी प्रजापति ने जोर दिया.
साथ ही रंगवासा औद्योगिक क्षेत्र एवं कन्फेक्शनरी क्लस्टर में चल रहे अतिक्रमण हटाने हेतु जिला प्रशासन से सहयोग का अनुरोध किया. आईटी पार्क-3, आईटी पार्क-4 एवं प्लग-एंड-प्ले पार्क से संबंधित प्रस्तावों की जानकारी कलेक्टर को दी गई. कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इंदौर जिले में चल रही सभी औद्योगिक परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निर्धारित समय-सीमा में क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखे.
