अमेरिकी टैरिफ के दबाव से समुद्री खाद्य उद्योग संकट में, नयी राहें भी खुलीं

कोच्चि, 06 नवंबर (वार्ता) अमेरिका के हाल ही में लगे नए आयात शुल्कों के बाद भारत का समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात क्षेत्र गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस झटके ने उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं को मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और बाजार विविधीकरण की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित किया है ताकि देश की निर्यात आय को बचाया जा सके।

ये मुद्दे कोच्चि स्थित सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित चौथे ‘इंटरनेशनल सिम्पोज़ियम ऑन मरीन इकोसिस्टम्स’ नाम से हुयी संगोष्ठी में प्रमुख रूप से उभरे।

इसमें ‘मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी’ के चेयरमैन डॉ. राम मोहन ने बताया कि अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच अमेरिका को भारत का सीफूड निर्यात लगभग छह फीसदी कम हुआ है। वहीं चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे एशियाई बाजारों में निर्यात में तेज़ वृद्धि देखी गई है। यह इस बात का संकेत है कि भारतीय निर्यातक धीरे-धीरे नए बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. जॉर्ज निनन ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत सीफूड सेक्टर में तकनीक आधारित स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा दे। उन्होंने शोधकर्ताओं, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर बल दिया ताकि वैल्यू एडिशन के अवसर बढ़ाए जा सकें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रह सकें।

बैठक में यह भी ज़ोर दिया गया कि भारत को अब केवल कच्चा समुद्री माल भेजने की बजाय रीप्रोसेसिंग और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स जैसे ब्रेडेड स्क्विड रिंग्स (ब्रेड से बनने वाले फिश पकौड़े), सुरिमी आइटम्स (फिश केक, फिश बॉल्स जैसी चीजें), रेडी-टू-ईट फिश फिलेट्स पर ध्यान देना चाहिए।

गौरतलब है कि वर्तमान में भारत का वैल्यू-एडेड सीफूड निर्यात मात्र 74.2 करोड़ डॉलर का है। यह चीन, वियतनाम, थाईलैंड, इक्वाडोर और इंडोनेशिया जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है।

प्रतिभागियों ने विशेष एक्वाकल्चर ज़ोन घोषित करने और मुक्त व्यापार समझौते को तेज़ी से आगे बढ़ाने की मांग की, ताकि वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सुधारी जा सके।

सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि ए. जे. थरकन ने कहा कि अमेरिका अब तक भारतीय झींगा (श्रिम्प) निर्यात का सबसे बड़ा बाजार रहा है लेकिन नई टैरिफ नीति ने व्यापार को प्रभावित किया है।

सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा कि मछली उत्पादकों, निर्यातकों, चारा और मछली आहार निर्माताओं, जलीय चारा उद्योगों, साहसिक खेल संचालकों, तटीय पारिस्थितिक पर्यटन प्रवर्तकों, मछली पालकों और मछुआरों के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को दस्तावेज की शक्ल दी जायेगी और इसे रोडमैप में शामिल किया जाएगा।

 

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