
जबलपुर। भोपाल के समीप भोजपुर-बैरसिया रोड निर्माण के लिए 488 पेड़ों को काटे के संबंध में संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान पेश किये गये हस्ताक्षेप आवेदन को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट जस्टिस चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार के तरफ से पेश जवाब पर असंतोष व्यक्त किया। युगलपीठ ने कहा कि वर्तमान फोटो देखकर साफ पता चलता है कि किसी भी पेड़ को प्रत्यारोपित नहीं किया गया है, बल्कि पेड़ों को पूरी तरह से काट दिया गया है। युगलपीठ ने कथित रूप से प्रत्यारोपित किए गए 253 पेड़ों की तस्वीरें जीपीएस लोकेशन के साथ पेश करने के निर्देश दिए। याचिका पर अगली सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने अखबार में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू की थी। खबर में यह तथ्य उजागर किया गया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए लोनिवि रायसेन ने बिना अनुमति के 488 पेड़ काट दिए।
नियमानुसार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत राज्य सरकार को पेड़ काटने से जुड़े मामलों के लिए एक कमेटी का गठन करना है। यदि किसी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने की जरूरत हो तो उक्त समिति से अनुमति लेना अनिवार्य है। इस मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित 9 सदस्यीय समिति या वृक्ष अधिकारी से कोई अनुमति नहीं ली गई है।
याचिका की सुनवाई के दौरान भोपाल निवासी नितिन सक्सेना से हस्ताक्षेपकर्ता बनाने का आवेदन पेष किया। आवेदन में कहा गया था कि प्रस्तावित निर्माण कार्य एक संरक्षित स्मारक, अर्थात् परमारकालीन ऐतिहासिक बाँध कीरतनगर के आसपास किया जा रहा है। सरकार की तरफ से पेष जवाब में बताया गया कि कलेक्टर द्वारा 3 जून 2025 को 448 पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी गई थी। जिन पेड़ों को स्थानांतरित नहीं किया जा सका, उनसे 10 गुना अधिक पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा 253 पेड़ों का प्रत्यारोपण किया गया है।
युगलपीठ ने सरकार के जबाव पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि तस्वीरों से स्पस्ष्ट है कि किसी भी पेड़ को प्रत्यारोपित नहीं किया गया है, बल्कि पेड़ों को पूरी तरह से काट दिया गया है। कुछ पेड़ों के तने ज़मीन में गाड़ दिए गए हैं, जिनमें से कुछ में अंकुर निकलने लगे हैं। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेष जारी किये।
