
पचमढ़ी। मध्यप्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में मंगलवार को इको सेंसेटिव जोन (ईएसजेड) की सीमा विस्तार के विरोध में नगर पूरी तरह बंद रहा। बाजारों में सन्नाटा पसरा नजर आया और स्थानीय नागरिकों ने इस फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।
पचमढ़ी वासियों ने नजूल भूमि और छावनी क्षेत्र को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में शामिल किए जाने का विरोध करते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के संचालक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नागरिकों ने मांग की कि ईएसजेड का प्रभाव केवल कोर क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट की सीमा से 100 मीटर तक ही सीमित रखा जाए।
नागरिकों ने बताया कि 9 अक्टूबर 2025 के पत्र क्रमांक 1869 के तहत छावनी क्षेत्र एवं नजूल क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन में शामिल करने का उल्लेख किया गया है, जो कि 9 अगस्त 2017 की अधिसूचना के विपरीत है। उस अधिसूचना के अनुसार, इको सेंसेटिव जोन का विस्तार केवल 100 मीटर तक ही सीमित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा प्रस्तावित विस्तार से नगर की घनी आबादी, छावनी और राजस्व ग्रामों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। नागरिकों ने मध्यप्रदेश शासन से आग्रह किया है कि वास्तविक तथ्यों पर विचार कर सीमा विस्तार को रोकते हुए जोन की सीमा 100 मीटर तक ही सीमित की जाए।
इस दौरान सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और नगरवासियों ने शांतिपूर्वक रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा।
