इंदौर। परोपकार और साहस की अनुपम मिसाल पेश करते हुए इंदौर की युवा अधिवक्ता अभिजिता प्रवीण राठौर 38 वर्ष ने मृत्यु के बाद भी कई लोगों को नवजीवन दे दिया. जुपिटर विशेष अस्पताल में उपचार के दौरान ब्रेन डेड घोषित होने के बाद, उनके परिजनों ने दिवंगत की इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान की स्वीकृति दी. उनके लिवर, दोनों किडनी, आंखों का कॉर्निया और त्वचा दान किए गए, जिससे कई मरीजों को नई जिंदगी मिलने जा रही है.
अभिजिता राठौर के अंगदान के लिए शहर का 65वां ग्रीन कॉरिडोर बना. रविवार सुबह नगर प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और चिकित्सा दल के सहयोग से जुपिटर अस्पताल से सीएचएल और चोइथराम अस्पतालों तक अंगों को ले जाया गया. पहला ग्रीन कॉरिडोर जुपिटर से सीएचएल तक 9 मिनट (11ः21 से 11ः30 बजे तक) में और दूसरा सीएचएल से चोइथराम तक 8 मिनट (11ः36 से 11ः44 बजे तक) में पूरा हुआ. जुपिटर हॉस्पिटल में निमोनिया के इलाज के दौरान अभिजिता को गंभीर ब्रेन हेमरेज हुआ था. उपचार के तमाम प्रयासों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया.
परिजनों ने पेश की परोपकार की मिसाल
गहन दुःख के इस कठिन समय में अभिजिता के पति प्रवीण राठौर, माता गिरिबाला राठौर, पिता रतन सिंह राठौर सेवानिवृत्त उपसंचालक लोक अभियोजन और भाई अभिजीत सिंह राठौर लोक अभियोजक, जिला न्यायालय इंदौर सहित परिजनों ने संवेदनशीलता और परोपकार की मिसाल पेश करते हुए अंगदान को मंजूरी दी. सोटो मध्यप्रदेश की टीम, जुपिटर हॉस्पिटल प्रबंधन और मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट जीतू बगानी, संदीपन आर्य, राजेंद्र माखिजा, हरपाल सितलानी, लकी खत्री, डॉ. रेणु जयसिंहानी के समन्वय से यह प्रक्रिया पूरी की गई. उनका लिवर सीएचएल हॉस्पिटल के 50 वर्षीय मरीज को, एक किडनी जुपिटर हॉस्पिटल की 35 वर्षीय महिला मरीज को, दूसरी किडनी चोइथराम हॉस्पिटल के 27 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित की गई. जबकि आंखें शंकर आई बैंक और त्वचा चोइथराम स्किन बैंक को सौंपी गई.
सेवा और संवेदना का प्रतीक रहीं अभिजिता
अभिजिता राठौर न केवल एक सफल अधिवक्ता थीं, बल्कि एक संवेदनशील पत्नी, बेटी और बहन भी थीं. उन्होंने इंजीनियरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में डिग्री के बाद एलएलबी और क्रिमिनोलॉजी में एलएलएम की उपाधि हासिल की थी. उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय में उन्होंने अपनी मेहनत और मिलनसार स्वभाव से विशेष पहचान बनाई थी. उनके परिजनों के अनुसार, अभिजिता हमेशा दूसरों की मदद को तत्पर रहती थीं. अपने जीवनकाल में वे समाजसेवा और न्याय के क्षेत्र में सक्रिय थीं. उनके परिवार ने कहा कि वह हमेशा कहती थीं कि मृत्यु के बाद भी अगर किसी की जिंदगी बचाई जा सके तो यह सबसे बड़ा धर्म है.
गार्ड ऑफ ऑनर से दी अंतिम विदाई
मध्यप्रदेश शासन की ओर से अधिवक्ता अभिजिता राठौर को उनके असाधारण योगदान के लिए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई. विजयनगर मुक्तिधाम में भावभीनी श्रद्धांजलि के दौरान हर आंख नम थी. इस अवसर पर संभाग आयुक्त सुदाम खेड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राजेंद्र राठौर, सीएचएमओ डॉ. माधव हासानी सहित कई अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे. सोटो मध्यप्रदेश के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष पुरोहित, शुभम वर्मा, निधि शर्मा ने केंद्र सरकार के रोटो और नोटो विभाग से लगातार समन्वय कर पूरी प्रक्रिया को सफल बनाया.
