जम्मू, 03 मार्च (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि ‘विकसित भारत’ का सपना तभी साकार होगा, जब देश के हर राज्य और हर क्षेत्र का संतुलित एवं समावेशी विकास हो। उन्होंने आगाह किया कि यदि प्रगति कुछ चुनिंदा राज्यों या क्षेत्रों तक सीमित रही तो राष्ट्रीय लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
मुख्यमंत्री ने ‘होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ डिस्ट्रिक्ट्स: ट्रांसफॉर्मिंग गवर्नेंस फॉर विकसित भारत’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सुशासन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “ विकसित भारत तभी बनेगा जब पूरा भारत विकसित होगा। अगर विकास मुट्ठीभर राज्यों तक सीमित रहा तो यह सपना अधूरा रह जाएगा।”
यह सम्मेलन भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जम्मू-कश्मीर सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, लोकसभा सांसद जुगल किशोर, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीएआरपीजी सचिव रचना शाह, डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव, डीएआरपीजी की संयुक्त सचिव सरिता चौहान, सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त सचिव एम राजू, वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा और जेकेएएस अधिकारी, सेवानिवृत्त सिविल सेवक और देश भर से आए प्रतिभागी मौजूद थे।
श्री अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से लेकर असम, गुजरात और तमिलनाडु-केरल तक हर क्षेत्र को ठोस प्रगति का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब तक हर क्षेत्र विकास नहीं देखेगा, विकसित भारत केवल नारा बनकर रह जाएगा। ”
उन्होंने ‘बॉटम-अप’ (नीचे से ऊपर) शासन मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि जिला स्तर पर सुशासन ही राष्ट्रीय परिवर्तन की कुंजी है। उन्होंने विश्वास जताया, “अगर जिले प्रदर्शन करेंगे, तो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बेहतर करेंगे, और अंततः देश विकसित होगा।”
मुख्यमंत्री ने ई-ऑफिस प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल प्रशासन से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। उन्होंने कहा, “अब फाइलें टाइम-स्टैम्प होती हैं। तकनीक ने काम आसान किया है, लेकिन जवाबदेही भी बढ़ाई है।”
उन्होंने वर्चुअल बैठकों के जरिए जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय की भी सराहना की, हालांकि अनावश्यक व्यवधान से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि नागरिक-केंद्रित पहलों का वास्तविक क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने टिप्पणी की “अगर सिंगल विंडो है, तो वह सच में सिंगल विंडो होनी चाहिए, न कि एक और खिड़की और फिर दीवार।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सम्मेलन केवल सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का मंच नहीं, बल्कि आपसी समन्वय और संबंध मजबूत करने का अवसर भी हैं। उन्होंने जम्मू को सम्मेलन स्थल चुनने के लिए आभार जताते हुए भविष्य में श्रीनगर में भी ऐसे आयोजन करने का आमंत्रण दिया।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन की चर्चाएं देशभर में सुशासन को मजबूत करने में सार्थक योगदान देंगी।
