50 साल से 33 रुपए प्रतिमाह पेंशन से बुजुर्ग विधवा लड़ रही है हक की लड़ाई, खाते में आई सिर्फ तारीख

ग्वालियर।ग्वालियर की एक 79 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपने हक की लड़ाई में जीवन के 50 साल गवां दिए, लेकिन 50 वर्ष बाद भी उसे बदले में मिला है तो सिर्फ तारीख और सिर्फ तारीख.

साल 1971 में आरक्षक पद से इस्तीफा देकर साल 1985 में काल के गाल में समाए शंकरलाल श्रीवास्तव की विधवा मिथिलेश श्रीवास्तव प्रोविजनल पेंशन के 33 रुपए से गुजारा कर रही है, लेकिन आरक्षक पति की पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों के भुगतान की उनकी लड़ाई अभी भी जारी है.

गौरतलब है आरक्षक शंकरलाल श्रीवास्तव की साल 1985 में हुई मौत के बाद से उनकी विधवा पति की पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य भत्तों के भुगतान के लिए कोर्ट केस ही लड़ रही हैं, लेकिन मामला खत्म नहीं हो रहा. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट याची मिथिलेश के पक्ष में फैसला भी दे चुका है, पुलिस विभाग को भुगतान की तारीख ही नहीं मिल रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक विधवा मिथिलेश श्रीवास्तव को पुलिस विभाग से भुगतान की अगली तारीख नवंबर के दूसरे सप्ताह की मिली है. इस मामले मे सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के वकील से कहा कि यह सुनिश्चित करें कि अब और देरी न हो. जस्टिस ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ये केस हमारी और आपकी उम्र से तो बड़ा ही होगा.

मामले की ताजा सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन नहीं होने पर एसपी श्योपुर को कोर्ट रूम में उपस्थित होना होगा. विधवा को भुगतान में हो रही देरी से कोर्ट कितना नाराज है. इसका अंदाजा कोर्ट की स्पष्टीकरण देने वाली टिप्पणी से समझा जा सकता हैं.

दरअसल, मध्य प्रदेश पुलिस मे आरक्षक पद पर कार्यरत शंकरलाल श्रीवास्तव ने 23 साल नौकरी करने के बाद नवंबर 1971 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया था और 24 नवंबर 1985 को उनकी मृत्यु हुई. उनकी विधवा मिथलेश श्रीवास्तव ने ग्रेच्युटी, पेंशन व अन्य रिटायरमेंट भत्ते के लिए पुलिस विभाग को खत लिखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

पुलिस विभाग द्वारा कोई जवाब नहीं दिए जाने पर विधवा मिथिलेश श्रीवास्तव ने पति के पेंशन और भत्तों के लिए सिविल सूट दायर किया. लम्बी सुनवाई के बाद 13 अगस्त 2005 को उनके पक्ष में फैसला आया, लेकिन विभाग पिछले 50 साल से कोई न कोई खामी बताकर उन्हें लाभ से वंचित करता आ रहा है.

ताजा सुनवाई में एसपी श्योपुर को निर्देश लिखवाने के बाद हाई कोर्ट ने सरकारी वकील से कहा- अब इस केस में और समय नहीं लगना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग कोर्ट में विधवा को भुगतान देन का केस 50 साल से चल रहा है, जो आपकी और हमारी उम्र से तो बड़ा ही होगा.

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