आज का विश्व गहराते जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की मार से जूझ रहा है. प्रकृति के संसाधनों का अनुचित दोहन हमारी पृथ्वी को संकट में डाल रहा है. ऐसे समय में जब संकट हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, तो नई पीढ़ी,विशेषकर जेन-जी और मिलेनियल्स ( क्रमश:18 से 25 वर्ष और 25 से 35 वर्ष तक के युवा)ने एक नई जागरूकता और जिम्मेदारी की ओर कदम बढ़ाया है. यह युवा पीढ़ी न केवल पर्यावरण की चिंता कर रही है, बल्कि हर रोज़ अपने व्यवहार में उसे प्राथमिकता दे रही है. डेलॉइट ग्लोबल के 2025 के सर्वेक्षण ने यह साबित कर दिया है कि ये युवा जमीन से जुड़ी, हौसले से भरी और परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध हैं. पर्यावरण संरक्षण उनकी भावनात्मक चिंता मात्र नहीं है, बल्कि यह उनका जीवन मूल्य बन चुका है.एक तथ्य यह भी सामने आया है कि करीब 65 फीसद जेन-जी और 63 फीसद मिलेनियल्स पर्यावरण समस्याओं को गंभीरता से देखते हैं. वे जलवायु परिवर्तन के खतरों को साफ समझते हैं और खुद को समाधान का हिस्सा मानते हैं. शायद इसलिए ही उनकी बड़ी संख्या नौकरी चुनते वक्त कंपनी की पर्यावरण नीति को जांचती है. यह संकेत है कि अब कॉर्पोरेट जगत भी पर्यावरण संरक्षण को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझ रहा है और इसे व्यापार में सफलता की कुंजी मान रहा है.
यह जागरूकता केवल कार्यक्षेत्र या नौकरी तक सीमित नहीं है. उपभोग की आदतों में भी इन युवाओं ने बड़ा बदलाव लाया है. वे इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड वाहनों को अपनाना चाहते हैं, सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं और टिकाऊ उत्पादों के लिए अधिक निवेश करने को तत्पर हैं. उनकी यह सोच बताती है कि उनका पर्यावरण संरक्षण कोई दूर की बात नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन की जरूरत है. 43 प्रतिशत जेन-जी और 47 प्रतिशत मिलेनियल ऊर्जा की बचत और पानी संरक्षण में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, जो आश्चर्यजनक है. पर्यावरण के प्रति यह समर्पण नए सामाजिक अनुबंध की शुरुआत है, जो विकास और संरक्षण को विरोधी विचार नहीं, बल्कि परस्पर पूरक मानता है.आज के युवा जानते हैं कि तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं. इसी समझ से वे हरित ऊर्जा में निवेश को सफल और रोजगार का नया रास्ता मानते हैं. यह सोच न केवल पृथ्वी को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति को भी गति देगी. दरअसल,कार्बन उत्सर्जन कम करना, टिकाऊ कार्यस्थल बनाना, और प्रभावी कदम उठाना अब आवश्यक हो गए हैं. यह बदलाव किसी बाहरी आंदोलन से नहीं, बल्कि युवाओं की आंतरिक नैतिक प्रेरणा से आ रहा है. वे पर्यावरण को केवल एक विषय के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि वह उनके मूल्य प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है. इस नई सोच में पूरी दुनिया के लिए एक संदेश छुपा है कि पृथ्वी को बचाने की सबसे बड़ी आशा अब अंतरराष्ट्रीय संधियों या सरकारी नीतियों में नहीं, बल्कि युवा वर्ग की जागरूकता और प्रतिबद्धता में है. जेन-जी और मिलेनियल पीढ़ी ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ एक विकल्प नहीं, जीवन की अनिवार्यता है. उनकी यह जागरूकता और कृत्यों की प्रतिबद्धता एक प्रेरणा है, जो हम सभी को अपने कदम पर्यावरण की ओर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है.इसलिए हमें चाहिए कि हम भी नवयुवकों के इस संदेश को समझें, उनका समर्थन करें और अपने छोटे-छोटे प्रयासों से इस धरती को सुरक्षित करें. पर्यावरण संरक्षण अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी जि़म्मेदारी और पहचान बन गई है. अगर हम सब मिलकर इस नई पीढ़ी के साथ कदम से कदम मिलाएं, तो स्वाभाविक रूप से पृथ्वी का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल होगा.
