
सिंगरौली। जिले में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया जब तीन लोगों ने खुद को मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़ा बताकर कलेक्टर से टेंडर कार्य कराने की कोशिश की। मामला तब उजागर हुआ जब एक फर्जी कॉल के जरिए कलेक्टर गौरव बैनल को मुख्य सचिव अनुराग जैन बनकर फोन किया गया। कॉल करने वाले ने कहा कि मिश्रा जी को भेजा जा रहा है, जिनका टेंडर संबंधी काम देखना है।
कलेक्टर को तुरंत शक हुआ क्योंकि उनके पास मुख्य सचिव का वास्तविक नंबर मौजूद था। उन्होंने तुरंत एसपी को सूचना दी और जाल बिछा दिया। अगले दिन दो आरोपी सचिन्द्र तिवारी (23) निवासी कुशमहरा और वाल्मिकी प्रसाद मिश्रा (44) निवासी रीवा, जो आईबी में सब इंस्पेक्टर के रूप में पदस्थ थे कलेक्ट्रेट पहुंचे। पुलिस पहले से ही मौके पर मौजूद थी और दोनों को वहीं हिरासत में ले लिया गया।
पूछताछ के दौरान तीसरे आरोपी सचिन कुमार मिश्रा, जो वाल्मिकी मिश्रा का पुत्र है, को भोपाल से ट्रेस कर पकड़ा गया। तीनों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। आरोपियों पर बीएनएस की धारा 204, 319, 61 और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, ये आरोपी डीएमएफ फंड से संबंधित टेंडर को अपने पक्ष में करवाने की साजिश रच रहे थे। अब पुलिस उनकी पुरानी गतिविधियों और ठेकों की भी जांच कर रही है। शहर में यह चर्चा है कि पिछले दो वर्षों से डीएमएफ के कार्यों में दलालों का दखल बढ़ा है और सामग्रियों की खरीदी में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
पुलिस का बयान:
कोतवाली पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सचिन मिश्रा ने षड्यंत्रपूर्वक अपने पिता वाल्मिकी मिश्रा और सहयोगी सचिन्द्र तिवारी को कलेक्ट्रेट भेजा था ताकि डीएमएफ से जुड़े कार्य अपने हित में करवाए जा सकें। तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजकर विवेचना जारी है।
