सतना : छठ पर्व के तीसरे दिन निर्जला व्रती महिलाओं ने सोमवार को डूबते सूर्य को अघ्र्य देकर संतान की लंबी आये के साथ सुख समृद्धि की कामना की. इस दौरान छठ पर्व से जुड़े लोक गीत लोगों कोनों में गंूजते रहे. मंगलवार की सुबह उगजे सूर्य को अघ्र्य देने के बाद 36 घंटे से चला आ रहा निर्जला उपवास महिलाओं द्वारा तोड़ जाएगा.
वैसे तो शहर सहित आस पास के कई क्षेत्रों में छठ पर्व का उल्लास देखने को मिल रहा था.
लेकिन बिरला रोड पर संतोषी माता मंदिर क्षेत्र में जन सैलाब उमड़ पड़ा. शाम के 4 बजे से ही लोगों को टोकरी लेकर वहां पहुंचने का सिलसिला आरंभ हो गया था. इस दौरान जहां निर्जला व्रती महिलाएं मंगल गीत गाते हुए तालाब की ओर बढ़ रही थीं. वहीं उनके साथ उनके परिजन भी फल और प्रसाद से भररी टोकरी लेकर चल रहे थे. कुछ महिलाएं अपने सिर पर फलों का डोला और हाथ में कलश लिए हुए थीं.
घट पर पहुंचने के बाद महिलाओं द्वारा छठी मईया की पूजा अर्चना करते हुए विभिन्न प्रकार के फल और ठेकुआ अर्पित किया गया. जिसके बाद फूल माला चढ़ाकर डूबते सूर्य का इंतजार किया जाने लगा. इस दौरान आस पास चारों ओर छठी मईया के भक्ति गीत गुंजाएमान हो रहे थे. जैसे ही सूर्य डूबने को हुआ वैसे ही महिलाएं तालाब के पानी में चली गईं. जहां पर घुटनों तक पानी में खड़े होकर पूजन करते हुए अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया गया.
इस दौरान छठी मईया से संतान की लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना की गई. जिसके बाद पूजन-अर्चन कर भक्ति गीत गाते हुए महिलाएं अपने अपनें परिजनों के साथ वापस लौट गईं. इसी कड़ी में मंगलवार की सुबह सभी व्रती महिलाएं एक बार फिर से जलाशय के किनारे एकत्र होंगी. जहां पर घुटनों तक पानी में खड़े होकर उदीयसमान सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा.
उगते सूर्य को अघ्र्य च पूजन अर्चन करने के बाद महिलाओं का पिछले 36 घंटे से चला आ रहा निर्जला व्रत का पारण किया जाएगा. जिसके बाद डठी मईया का प्रसाद घर परिवार व रिश्तेदार सहित पड़ोसियों को वितरित किया जाएगा. गौरतलब है कि 4 दिवसीय छठ पर्व का आरंभ 3 दिन पहले नहाए-खाए से आरंभ हुआ था.
