आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता, बाजार पहुंच और ऊर्जा व्यापार पर दबाव चिंता का सबब: जयशंकर

कुआलालंपुर/नयी दिल्ली 27 अक्टूबर (वार्ता) विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता, बाजार पहुंच और ऊर्जा व्यापार पर दबाव की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि इससे बाजार में विकृतियां पैदा हो रही हैं। डा.जयशंकर ने सोमवार को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में 20 वें पूर्वी एशिया सम्मेलन में अपने वक्तव्य में आतंकवाद से निपटने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाये जाने पर भी जोर दिया। दुनिया में अनेक जगहाें पर चल रहे संघर्षों तथा टकरावों पर उन्होंने कहा कि इनके तात्कालिक और दूरगामी दोनों तरह के गंभीर प्रभाव हैं इसलिए भारत इनके समाधान का पक्षधर है।
विदेश मंत्री ने बहुध्रुवीय व्यवस्था को लेकर चल रही बहस के बीच कहा कि बहुध्रुवीयता केवल स्थायी ही नहीं है बल्कि यह व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा किये जाने की जरूरत है। उन्होंने नये सदस्य तिमोर-लेस्ते का भी स्वागत किया।
उन्होंने मौजूदा जटिल दौर में आपूर्ति श्रंखला की विश्वसनीयता के कारण बाजार में विकृतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों को मनमाने ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ” हम एक जटिल दौर में मिल रहे हैं। आपूर्ति श्रृंखलाओं की विश्वसनीयता और बाज़ारों तक पहुंच को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति बहुत प्रतिस्पर्धी हो गई है तथा प्राकृतिक संसाधनों की खोज तो और भी ज़्यादा। ऊर्जा व्यापार लगातार सीमित होता जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बाज़ार विकृतियां पैदा हो रही हैं। सिद्धांतों को चुनिंदा ढंग से लागू किया जाता है और जो उपदेश दिया जाता है, ज़रूरी नहीं कि उस पर अमल भी किया जाए।”
डा. जयशंकर ने बदली हुई परिस्थिति में दुनिया की प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया और कहा कि बदलाव का अपना अलग ही महत्व होता है। दुनिया अनिवार्य रूप से नई परिस्थितियों के अनुरूप प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने कहा, ” समायोजन किए जाएंगे, गणनाएं लागू होंगी, नई समझ विकसित होगी, नए अवसर सामने आएंगे और लचीले समाधान निकाले जाएंगे। अंततः, तकनीक, प्रतिस्पर्धा, बाज़ार के आकार, डिजिटलीकरण, कनेक्टिविटी, प्रतिभा और गतिशीलता की वास्तविकताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। बहुध्रुवीयता केवल स्थायी नहीं है, बल्कि विकसित भी होगी। ये सभी गंभीर वैश्विक चर्चाओं का विषय हैं।”

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