रीवा: रीवा महानगर की तर्ज पर विकास करते हुए आगे की ओर बढ़ रहा है. हार्न मारते वाहनो की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. लेकिन यातायात व्यवस्था वही वर्षो पुरानी है. फ्लाई ओवर बनने और सिग्नल लगने के बावजूद यातायात व्यवस्था ठप्प है. ऐसा कोई मार्ग और चौराहा नही जहा जाम न लगता हो. एम्बुलेंस तक जाम में फसती है, मगर यातायात पुलिस नजर नही आती.यह बात और है कि रात के अंधेरे में यातायात पुलिस नजर आ जाती है, फिर चाहे बाईपास हो या शहर के मुख्य चौराहे. रात 9.30 बजे के बाद शहर के अंदर भारी वाहनो का प्रवेश शुरू हो जाता है जो कि प्रतिबंधित है.
गौरतलब है कि शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है. दिन भर लोग जाम से जूझते रहते है. व्यंकट मार्ग, अमहिया मार्ग, धोबिया टंकी, विश्वविद्यालय मार्ग सहित कई चौराहो में जाम की स्थित बनी रहती है. यहा यातायात पुलिस के जवान नजर नही आते, लोग खुद गाडिय़ों से उतर कर जाम खुलवाते है. धनतेरस और दीपावली जैसे त्यौहार में यातायात व्यवस्था बनाने में यातायात पुलिस पूरी तरह से असफल रही. त्यौहार के समय भी लोग जाम से जूझते रहे.
यातायात थाना प्रभारी से लेकर तैनात सुबेदार चौराहो और सडक़ो पर नजर नही आते, कभी कभार चालान की कार्यवाही करते देखे जाते है. ज्यादातर रात में ही यातायात पुलिस की गाडिय़ां नजर आती है. सुपर एवं संजय गांधी अस्पताल पहुंचने वाली एम्बुलेंस भी जाम में फसी रहती है. बीती शाम धोबिया टंकी के पास लगे जाम में एम्बुलेंस हाफती नजर आई. अमहिया और व्यंकट मार्ग में अक्सर लगने वाले जाम में एम्बुलेंस फसी रहती है. आखिर शहर में लगने वाले जाम से निजात कब मिलेगी.
बगैर डीएसपी के यातायात थाना
शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है, आम आदमी परेशान है लेकिन नेताओं और आला अफसरो को कोई सरोकार नही है. यातायात थाना पिछले एक साल से बगैर डीएसपी के चल रहा है. हमेशा यहा डीएसपी की पदस्थापना रही है, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर रहने के साथ-साथ अधिनस्थ कर्मचारी भी सही तरीके से काम करते थे. लेकिन इस समय यहा मनमानी का दौर चल रहा है. सब अपने-अपने जुगाड़ में लगे है और यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. कुछ समय के लिये सीएसपी को यातायात डीएसपी का प्रभार दिया गया था बाद में हटा दिया गया. सवाल यह उठता है कि आखिर यातायात डीएसपी की पदस्थापना क्यो नही की जा रही है. जबकि लम्बे समय से पद खाली है और शहर तेजी से बढ़ रहा है इसके साथ ही वाहनो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है पर व्यवस्था वही 20 साल पुरानी है
