
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2025: बिहार में विपक्षी महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर शुरू हुई आपसी तकरार अब साझा चुनाव प्रचार अभियान और संयुक्त घोषणा पत्र पर भी संकट पैदा कर रही है। कई विधानसभा सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ होने के कारण राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के बीच दूरी स्पष्ट रूप से बढ़ती जा रही है, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। साझा घोषणा पत्र को अंतिम रूप देने की बातचीत भी मतभेद गहराने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है।
महागठबंधन में कुल 12 विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर गंभीर विवाद है। इनमें से छह सीटों पर राजद और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इसके अलावा, कांग्रेस और सीपीआईएम (CPIM) चार सीटों पर, जबकि राजद और वीआईपी (VIP) दो सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। बेल्दौर सीट जैसी विवादित सीटों पर सहयोगी दलों ने आधिकारिक रूप से तय संख्या से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। वीआईपी ने 9 की जगह 15, सीपीआई ने 6 की जगह 9, और सीपीएम ने 4 की जगह 6 उम्मीदवार घोषित किए हैं, जिससे गठबंधन में कुल उम्मीदवारों की संख्या 243 से बढ़कर 254 हो गई है।
राजद और कांग्रेस के बीच बढ़ते मतभेद के कारण साझा चुनाव प्रचार भी शुरू होने पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं को सक्रिय किया जा रहा है। इसी क्रम में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत का पटना दौरा संभावित है, जहाँ उनकी तेजस्वी यादव से मुलाकात हो सकती है। राजद से रिश्ते में आई खटास के बाद, कांग्रेस ने बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावारु को पीछे हटा दिया है। इस आंतरिक संघर्ष पर भाजपा ने तंज कसते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि केवल लालू प्रसाद यादव ही एकमात्र नेता हैं।
