मजदूरों के हक पर डाका

निबोरा पंचायत में मनरेगा में मशीनों से हो रहा काम

पलेरा: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जो ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देती है, वह निबोरा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में सरपंच पति हरगोविंद चढ़ार, सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी और रोजगार सहायक अवधेश सिंह गौर की तिकड़ी मनरेगा कार्यों को मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से करवा रही है। इससे न केवल स्थानीय मजदूरों का हक़ छीना जा रहा है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की भी आशंका बढ़ गई है।

ग्रामवासियों के अनुसार धनजु पाल और मंजू पाल पिता गिरधारी पाल की जमीन पर तीन खेत तालाबों का निर्माण मनरेगा के तहत स्वीकृत कराया गया, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर काम मजदूरों से करवाने की बजाय दिनदहाड़े मशीनों से किया गया। यह सरकार की उस मंशा के विपरीत है जिसके तहत ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह योजना चलाई गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत में अधिकारियों की मनमानी चरम पर है और प्रशासन इस पूरे मामले से पूरी तरह बेखबर बना हुआ है। जब रिपोर्टर ने पंचायत सचिवालय पहुंचकर अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की, तो दोपहर 2 बजे तक कार्यालय पर ताला लटका मिला। इस स्थिति ने पंचायत में पारदर्शिता की कमी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही गड़बड़ियों को उजागर कर दिया है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।

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