शिवपुरी: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछोर में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित किया। यह सम्मेलन नारी शक्ति के सम्मान और उनके उत्थान को समर्पित रहा, जिसकी शुरुआत में ही मंत्री ने बड़ा कदम उठाया। उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी पुरुष जनप्रतिनिधियों और सदस्यों से अनुरोध किया कि वे नीचे उतर जाएं ताकि मंच पर केवल महिलाएं ही रहें, जिससे नारी शक्ति का वास्तविक वर्चस्व स्थापित हो सके।
सिंधिया ने अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती पर उन्हें याद किया और कहा कि राजमाता ने नारी सशक्तिकरण का झंडा उठाकर देशव्यापी आंदोलन चलाया था। उन्होंने बताया कि राजमाता ने 1965 में महल की 60 एकड़ ज़मीन दान में देकर ग्वालियर में सिंधिया कन्या विद्यालय की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि उनकी दादी में सरस्वती का ज्ञान, माँ दुर्गा के न्याय की शक्ति और माँ लक्ष्मी का प्रेम था, क्योंकि नारी तो हमारी देवियों का ही रूप है।
उन्होंने कहा कि आज ‘नारी शक्ति’ माँ भारती के लिए एक प्रबल पंक्ति के रूप में चल पड़ी है। उन्होंने हंसमुखी, रामदेवी और मुन्नीबाई जैसे स्थानीय उदाहरण दिए, इसके अलावा उन्होंने क्रांति देवी की भी बात की जिन्होंने 329 समूहों की कमान संभालकर 1000 के छोटे निवेश से लाखों की कमाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि आप सिर्फ़ ज़िले की नहीं, आप भारत की कहानी हैं, यह उसी सफ़र की कहानी है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित और आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जा रहे हैं।सिंधिया ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर करारा निशाना साधते हुए कहा कि जहाँ कांग्रेस के समय में महिला को ‘बोझ’ समझा जाता था, वहीं आज मातृशक्ति देश का ‘भविष्य’ बन गई है।
