
झाबुआ। भारत के 15 राज्यों से आए 51 छात्र-छात्राएं, जो लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट दिल्ली से 8 दिवसीय झाबुआ दर्शन यात्रा पर पहुंचे थे। जिनके द्वारा जिले के विभिन्न गांवों में जाकर शिवगंगाा के विविध कार्यों तालाब निर्माण, मातावन (सामुदायिक वन पुनर्जीवन), आरोग्य रथ अभियान, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उद्यमिता का गहराई से अवलोकन किया।
8 दिनों की यह झाबुआ अध्ययन यात्रा विद्यार्थियों के लिए जीवन का एक अनूठा और प्रेरणादायक अनुभव रहीं। गांवों में रहकर उन्होंने श्रम, संस्कृति, भोजन और पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से यह जाना कि सामूहिक प्रयासों और परमार्थ की भावना से गांव कैसे आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकते हैं। प्रतिभागी आकाश भारद्वाज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आने के बाद मुझे समझ आया कि आदिवासी समाज की वास्तविक समस्याएं क्या हैं और वे उन्हें दूर करने के लिए किस तरह निरंतर प्रयासरत हैं। मैं आदिवासी समाज से प्रेरणा लेकर जा रहा हूं और भविष्य में गांवो के विकास कार्यों में अपना योगदान देने का संकल्प करता हूॅं।
जनजाति समाज संवेदशनील और आत्मसम्मान से भरा हुआ
प्रतिभागी कुणाल काइस्ता ने कहा कि झाबुआ आने से पहले मेरे मन में आदिवासी समाज के प्रति कई भ्रांतियां थीं, लेकिन यहाँ के लोगों से मिलकर वह सब दूर हो गया। मैने महसूस किया कि यह समाज अत्यंत संवेदनशील, सहयोगी और आत्मसम्मान से भरा है। आज, देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में रूरल इमर्शन के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में ‘झाबुआ दर्शन;’ एक महत्वपूर्ण अध्ययन-अनुभव सप्ताह के रूप में उभर रहा है, जो युवाओं को भारत की जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु बन चुका है।
