अशोकनगर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव को लेकर आशा कार्यकर्ताओं के लिए चलाया जा रहा पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कागज़ों में ही सिमटकर रह गया है। भोपाल की कम्युनिटी वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन संस्था द्वारा कोलुआ रोड स्थित उत्सव गार्डन में आयोजित इस प्रशिक्षण में व्यवस्थाओं की पोल खुलती नज़र आई।
नवभारत टीम के मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि प्रशिक्षण में अपेक्षित संख्या में आशाएं मौजूद नहीं थीं, जहां दर्जनों कार्यकर्ता होना चाहिए थे, वहां मात्र 19 आशाएं ही बैठी थीं। तीन में से केवल दो मास्टर ट्रेनर उपस्थित थे। इतना ही नहीं, प्रशिक्षण स्थल पर न तो भोजन का मीनू बोर्ड दिखा और न ही बजट की कोई सूची चस्पा थी। जब इस संबंध में मास्टर ट्रेनरों से सवाल किए गए, तो वे कैमरे के सामने ही बैनर और बोर्ड लगाते नज़र आए।
शासन की मंशा के अनुसार यह प्रशिक्षण आवासीय होना था, ताकि प्रतिभागी पूरी एकाग्रता के साथ सीख सकें, पर हकीकत उलटी है,
अधिकांश आशा कार्यकर्ता घर से ही प्रशिक्षण में आ-जा रही हैं। इससे न तो प्रशिक्षण का उद्देश्य पूरा हो पा रहा है और न ही बजट का उपयोग पारदर्शी रूप में हो रहा है।
इनका कहना है।
शहरी आशाओ के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है, प्रशिक्षण 24 आशाएं ले रहीं है, वहीं जो आशाएं प्रशिक्षण में नहीं आई हैं उनको देखते है वह क्यों नहीं आई। मीनू और बजट के जो बोर्ड नहीं लगे है उनको लगवाया जा रहा है। आशाए शहरी है इसलिए वह घर से ही आ रही है।
आंनद मोहन माथुर, डीसीएम
स्वास्थ्य विभाग अशोकनगर
