भारत-ब्रिटेन संबंधों में साझेदारी का नया अध्याय

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किर स्टार्मर की भारत यात्रा न केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम थी, बल्कि दो प्राचीन लोकतंत्रों के बीच उभरती हुई नई साझेदारी का संकेत भी थी. यह यात्रा, जो उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी, भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक रणनीतिक पुनर्परिभाषा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है.

मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किर स्टार्मर के बीच हुई मुलाकात का केंद्रबिंदु रहा — व्यापक रणनीतिक साझेदारी को अगले दशक के लिए नई दिशा देना. दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, जलवायु और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई. खास बात यह रही कि यह बातचीत केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि ठोस नीतिगत पहलुओं पर केंद्रित रही.जुलाई 2025 में हुए भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने जिस आर्थिक साझेदारी की बुनियाद रखी थी, इस यात्रा ने उसे आगे बढ़ाने का अवसर दिया. अब लक्ष्य है — 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना और 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ समाप्त करना. यह कदम दोनों देशों की आर्थिक परस्पर निर्भरता को नई गति देगा. स्टार्मर के साथ आए बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने इस विश्वास को और मज़बूत किया कि ब्रिटेन भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का निर्णायक साझेदार मानने लगा है.प्रधानमंत्री मोदी और स्टार्मर ने ‘विजन 2035’ रोडमैप की प्रगति की भी समीक्षा की. यह विजन भारत-ब्रिटेन संबंधों को केवल द्विपक्षीय सीमाओं से निकालकर वैश्विक मंच पर सह-नेतृत्व की भूमिका देने वाला ढांचा है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान उल्लेखनीय रहा कि भारत और ब्रिटेन “स्वाभाविक साझेदार” हैं — साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता से बंधे हुए.इस यात्रा की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि रही — ब्रिटेन के 9 विश्वविद्यालयों का भारत में कैंपस खोलने की घोषणा. यह निर्णय न केवल शिक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया अध्याय खोलेगा, बल्कि भारत के युवा जनसंख्या को विश्वस्तरीय शिक्षा तक सीधी पहुँच दिलाएगा. यह कदम भारत को “ग्लोबल नॉलेज हब” के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है.मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में दोनों प्रधानमंत्रियों की संयुक्त उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य का संबंध केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि डिजिटल और तकनीकी साझेदारी पर आधारित होगा. ब्रिटेन के वित्तीय नवाचार और भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे का संगम, वैश्विक फिनटेक नेतृत्व की दिशा में दोनों देशों को एक साथ खड़ा कर सकता है.सांस्कृतिक और जनसंपर्क के स्तर पर भी स्टार्मर की यात्रा जीवंत रही — यशराज स्टूडियो के दौरे से लेकर मुंबई में युवाओं के साथ फुटबॉल कार्यक्रम तक. इससे यह संदेश गया कि ब्रिटेन भारत को केवल कूटनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है.आज जब वैश्विक भू-राजनीति में नए गठजोड़ बन रहे हैं, भारत और ब्रिटेन के बीच यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति की गारंटी बन सकती है. किर स्टार्मर की यह यात्रा इस दिशा में एक मील का पत्थर है — जिसने यह संकेत दिया है कि 21वीं सदी की दुनिया में लंदन और नई दिल्ली अब केवल “साझेदार” नहीं, बल्कि “सह-नेता” बनकर उभर रहे हैं.

 

 

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