उत्तर बंगाल के चाय उद्योग को भारी नुकसान, श्रमिकों को नौकरी जाने का डर

सिलीगुड़ी, 09 अक्टूबर (वार्ता) उत्तर बंगाल में विनाशकारी बारिश और बाढ़ के कारण चाय उद्योग को काफी नुसकान पहुंचा है और श्रमिकों को नौकरी जाने का डर सता रहा है।

उद्योग विभाग के सूत्रों ने बताया कि सांपों के काटने और रात में जानवरों के हमलों के डर के बीच बड़ी संख्या में चाय बगानों में काम करने वाले श्रमिक नौकरी जाने से आशंकित हैं। चाय बगानों में काम करने वाले श्रमिकों में ज्यादातर आदिवासी समुदाय से हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में भीषण बारिश से आई बाढ़ से चाय बागानों के बड़े हिस्से जलमग्न हो गए हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस बाढ़ से उत्तर बंगाल के तराई और दार्जिलिंग के दोअर्स और जलपाईगुड़ी जिले के चाय बागानों को लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। चाय वहां की मुख्य नकदी फसल है

सूत्रों ने बताया कि बड़े, मध्यम और छोटे बागान मालिकों को कीचड़ भरे पानी के उतरने के बाद भारी नुकसान का अनुमान है। सीमांत मजदूरों की भी नौकरी जाने की आशंका है

पौधों को नुकसान पहुंचाने के अलावा मिट्टी की तलछट चाय की खेती में भी काफी बाधा डाला है। यह तबाही लगातार भारी बारिश के कारण हुई, जिसके कारण दोआर्स और तराई क्षेत्रों में भूस्खलन और भीषण बाढ़ आ गयी।

गौरतलब है कि शनिवार-रविवार की रात जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग जिलों में आई बाढ़ से क्षेत्र के 276 चाय बागानों में से 30 से अधिक बागान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

जलपाईगुड़ी के नागराकाटा चाय बागान में अनुमानित 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें एक कारखाने की दीवार गिरने से 10,000 किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय का नुकसान भी शामिल है।

एशिया के सबसे बड़े बागानों में से एक चेंगमारी चाय बागान सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार इसके लगभग 300 हेक्टेयर बागान जलमग्न हो गए, जिससे 50,000 चाय की झाड़ियां और 55,000 किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय नष्ट हो गई। इससे छोटे चाय उत्पादक, जो बंगाल के चाय उत्पादन में 64 प्रतिशत का योगदान करते हैं, भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जलढाका नदी के उफान और बाढ़ के घटते पानी से कई चाय बागान जलमग्न हो गए हैं और गाद की मोटी परतें जमा हो गई हैं, जिन्हें हटाने में भारी लागत और समय लगता है।

बारिश और बाढ़ ने चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों के आवास, पुल और सड़कों सहित रसद संबंधी बुनियादी ढ़ांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय चाय संघ ने केंद्र और राज्य सरकारों से राहत और समन्वित कार्रवाई की अपील की है ताकि नुकसान का पूरा आकलन किया जा सके।

नौ हजार से अधिक बाढ़ प्रभावित लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है। जलपाईगुड़ी जिले में 7,000 से अधिक लोग 18 शिविरों में रह रहे हैं और लगभग 2,000 लोग नागराकाटा के बामनडांगा में शरण लिए हुए हैं। अलीपुरद्वार जिले में लगभग 2,000 लोगों ने आठ शिविरों में शरण ली है।

सूत्रों ने बताया कि कच्चा माल ले जाने वाले भारी वाहन नहीं चल पा रहे हैं क्योंकि महत्वपूर्ण सड़कें क्षतिग्रस्त हो गयी हैं और पुल भी ढह गये हैं जिससे लोगों को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और स्वयंसेवकों द्वारा उपलब्ध कराई गई नावों से नदियां पार करना पड़ रहा है। लोग रस्सियों के सहारे नदियां पार करते हुए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

इससे भी अधिक दुखद बात यह है कि शनिवार को बिजली कनेक्शन कट जाने के बाद से कई ग्रामीण बिना बिजली के रह रहे हैं। पीने योग्य पानी की भी कमी है। इसके अलावा लोग सूर्यास्त के बाद बाहर निकलने से डरते हैं। उन्हें जानवरों के हमले और सांप के काटने का भी डर है।

 

 

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