6 करोड़ से बने मालवा मिल ब्रिज की 36 घंटे में ही खुल गई पोल

इंदौर. शहर का नया मालवा मिल ब्रिज, जिसे शुक्रवार को 6करोड़ रुपए की लागत से लोकार्पित किया था, मात्र 36 घंटे बाद ही पहली बारिश में जलमग्न हो गया और पुल की पोल खुलने से उसकी इंजीनियरिंग पर गंभीर सवाल उठ खड़े किए हैं. वहीं यह भी साबित हो गया कि नगर निगम में लाखों की सैलेरी लेने वाले इंजीनियर ऐसी रुम में बैठकर योजना बना लेते हैं.

रात भर हुई बारिश में ब्रिज पर पाटनीपुरा की दिशा वाला हिस्सा पानी में डूब गया, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. स्थानीय लोगों ने बताया कि ब्रिज की स्लैब ऊबड़-खाबड़ और सड़क के लेवल से लगभग 3 इंच नीचे होने की वजह से वाहन उछलते हैं और हादसे का खतरा बना रहता है. निर्माण के दौरान ब्रिज पर बिछाई गई ड्रेनेज लाइनें पूरी तरह काम नहीं कर रही हैं, जिसके कारण पानी का निकास नहीं हो सका. स्थानीय व्यापारी मनोज सोमवंशी ने बताया कि ब्रिज पर अभी भी रेत, गिट्टी और निर्माण सामग्री फैली हुई है. वहीं स्थानीय रहवासी राजेश मेहरा का कहना है कि पुल का स्लोप और सड़क के ऊंचाई स्तर का सही समन्वय नहीं किया, जिससे वाहन चालकों को ब्रिज पर चढ़ाई और उतराई में रुक-रुककर जाना पड़ता है. निगम द्वारा लोकार्पण के समय दावा किया था कि ब्रिज पूरी तरह से समस्या मुक्त है और एबी रोड तथा अटल द्वार रोड के ट्रैफिक दबाव में कमी आएगी. लेकिन रात की मामूली बारिश ने यह साबित कर दिया कि नगर निगम के इंजीनियर ऐसी रुम मैं बैठकर किस तरह से काम करते हंै. वहीं सोशल मीडिया पर ब्रिज की अधूरी स्लैब, धूल और पानी में डूबे हिस्सों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. नागरिक निगम से जल निकासी और सड़क सुधार कार्य तुरंत करने की मांग कर रहे हैं, ताकि आने वाली बारिश में स्थिति और खराब न हो.

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