
ब्यावरा। अत्यधिक जल भराव, पीला मोजेक रोग के कारण सोयाबीन फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. हालात यह है कि कई जगह जितना बीज खेत में बोया था उतना भी नहीं निकल पाया है तो कई जगह अत्यधिक कम पैदावार होने पर फसल तक नहीं कटाई क्योंकि जितनी सोयाबीन नहीं निकलेगी उससे अधिक कटाई की लागत लग जाती.
विदित है कि इस बार बोवनी के समय तथा बाद में अनुकूल बारिश होने से सोयाबीन फसल की स्थिति बहुत ही बेहतर रही. किंतु बाद में अत्यधिक बारिश होने के कारण पौधे की जड़ सडने लगी और पौधे को पूर तरह उसका भोजन नहीं मिलने से उसकी उन्नति थम गई.
लागत भी नहीं निकली
फसल कटाई के बाद अब सोयाबीन को मंडी में लाने का सिलसिला शुरु हो गया है. ग्राम काली कराड़ निवासी बापूलाल ने बताया कि उनके द्वारा अपने 8 बीघा खेत में सोयाबीन की बोवनी की थी इसमें ढाई से तीन क्विंटल बीज लगा और अब कटाई के बाद बमुश्किल तीन क्विंटल सोयाबीन भी नहीं निकली है. जबकि खाद, दवा, कटाई की लागत यह सब खर्च अलग से है. कृषक ने बताया कि हर बार वह दो ट्रॉली में भरकर सोयाबीन बेचने लाते थे किंतु इस बार लोडिंग ऑटो में चार बोरी में सोयाबीन लेकर आये है. ग्राम पड़ोनिया में एक खेत में एक बीघा में मात्र 27 किलो ही सोयाबीन निकली. इसी तरह अधिकांश खेत में एक बीघा में 50 किलो से अधिकाधिक एक क्विंटल तक ही सोयाबीन आई है. ग्राम बेड़ाबे, नापानेरा, बारवां, पारसाना सहित अनेक गांवों में काफी कम सोयाबीन निकली है.
कटाई नहीं की:
कई खेतो में बहुत ही कम सोयाबीन आने पर कटाई नहीं करते हुए खेत में बखर चलवाकर उसमें आगामी फसल की बोवनी की जाएगी. जानकारी के अनुसार ग्राम पारसाना में कुछ खेत में कम फसल आने पर कटाई नहीं करते हुए उसी पर बखर चलवाकर आने वाली फसल की बोवनी करने का निर्णय लिया है. ताकि फसल कटाई की लागत तो बच सके.
