दशहरे पर आत्म-विजय का संदेश

जबलपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिव उपहार भवन, प्रेमनगर सेवा केंद्र में विजयादशमी का पर्व आध्यात्मिक और सकारात्मक संकल्पों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाई-बहनों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ हवन से हुआ। उपस्थित जनों ने अपनी कमजोरियों, कमियों और अवगुणों को कागज़ पर लिखकर हवनकुंड में स्वाहा किया। यह प्रक्रिया इस संदेश को प्रतिपादित कर रही थी कि जीवन का वास्तविक दशहरा तभी मनाया जा सकता है जब हम अपने भीतर के रावण रूपी विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार—का दहन करें।

समारोह को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी विमला दीदी ने कहा कि बाहरी रावण दहन प्रतीकात्मक है, जबकि सच्ची विजयादशमी वह है जब हम आत्मा को परमात्मा से योग की शक्ति द्वारा विकारमुक्त करें। उन्होंने कहा कि परमात्मा की दिव्य अग्नि ही हमारे भीतर व्याप्त नकारात्मकता को समाप्त कर सकती है और यही आत्म-विजय का वास्तविक मार्ग है। इसके उपरांत ब्रह्माकुमारी विनीता दीदी ने सभी को राजयोग का गहन अभ्यास कराया। साधना सत्र के दौरान उपस्थित जनों ने शांति, एकाग्रता और आंतरिक शक्ति का अनुभव किया। दीदी ने बताया कि राजयोग के माध्यम से न केवल तनाव और दुख दूर होते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और आत्मबल का संचार भी होता है।

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