
आशीष कुर्ल भोपाल: आगर मालवा जिले में सौर ऊर्जा परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई किए जाने से हिरणों, तेंदुओं और अन्य वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास उजड़ने लगे है। इससे न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी पर गहरा असर पड़ा है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर भी सवाल हैं।
एमओईपीएफसीसी प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राजेश आर्य जायसवाल ने आरोप लगाया है कि एबी एनर्जाइजिंग सॉल्यूशंस प्रा. लि. ने वन विभाग से आवश्यक अनुमति लिए बिना बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की है। उनका कहना है कि हाल के महीनों में हजारों पेड़ों, जिनमें दुर्लभ चंदन के पेड़ भी शामिल हैं, को अवैध रूप से काटा गया, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को “अपरिवर्तनीय नुकसान” पहुंचा है।
जायसवाल ने यह भी दावा किया कि खसरा नंबर 754 की दर्ज वन भूमि पर परियोजना के लिए अतिक्रमण किया गया। इसके अलावा, लगभग 400 बीघा हरित वनों की भूमि, जो जैव विविधता से समृद्ध थी, को कंपनी की सहयोगी इकाई ऑयस्टर ग्रीन हाइब्रिड वन प्रा. लि. ने करीब 20 किसानों से खरीदा।
उन्होंने कहा, “पिछले एक वर्ष से अधिक समय से इस परियोजना पर काम चल रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण अनुमतियां — जैसे कि वन क्षेत्र से होकर जाने वाली एप्रोच रोड के लिए अनुमति — समय पर प्राप्त नहीं की गईं। कंपनी ने साफ तौर पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया है।”
जायसवाल के अनुसार, इस मुद्दे पर कई बार वन विभाग और ज़िला कलेक्टर से शिकायत की गई। यहां तक कि उनकी संस्था का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) से भी मिला, लेकिन आपत्तियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और काम जारी रहा।
इस विषय पर आगर मालवा के डीएफओ वीरेंद्र पटेल ने स्पष्ट किया कि विवादित भूमि राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा, “संभव है कि पेड़ों की कटाई और सड़क निर्माण के लिए राजस्व विभाग ने एनओसी जारी की हो। हमारा इसमें अधिकार सीमित है।” वहीं, ज़िला कलेक्टर प्रीति यादव ने कहा कि वह फाइल देखने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया देंगी।
इस संवाददाता ने कंपनी के जीएम मनीष गोयल और प्रोजेक्ट मैनेजर आज़ाद सिंह राठौर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की और एक कॉल काट भी दी।
यह विवाद नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए अहम है, लेकिन यदि परियोजनाएं बिना उचित निगरानी और नियमों के चलाई जाएं तो यह जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
स्थानीय समुदायों और पर्यावरणविदों ने परियोजना की मंजूरी की तत्काल समीक्षा और उल्लंघनों पर सख्त जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि आगर मालवा के नाज़ुक जंगलों को शायद पहले ही अपूरणीय क्षति पहुंच चुकी है।
