कैमोर: एशिया में प्रसिद्ध औद्योगिक नगरी कैमोर ने एसीसी दशहरा उत्सव समिति द्वारा ऐतिहासिक दशहरा पर्व का आयोजन वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुरूप धूमधाम से इस वर्ष भी मनाया जा रहा है, दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष अतुल दत्ता(अदानी एसीसी कैमोर चीफ प्लांट हैड)ने बताया कि रामलीला/दशहरा उत्सव समिति द्वारा लगभग 90 वर्षों से लगातार रावण का विशालकाय पुतला तैयार किया जाता आ रहा है। इस वर्ष भी लगभग 85 फुट ऊंचा रावण के पुतले का निर्माण कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया जा गया है रावण के पुतले के साथ ही मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले का दहन 2 अक्टूबर विजयदशमी/दशहरे के दिन,रात्रि 8 बजे इलेक्ट्रॉनिक तीर से अद्भुत आतिशबाजी के बीच होगा।
श्री वाराणसी रामलीला मंडल मंचन
विजयदशमी पर्व का शुभारंभ 18 सितंबर से सुप्रसिद्ध रामलीला मंडली द्वारा मंचन के साथ किया गया है। रामलीला मैदान में सजाए गए भव्य मंच पर भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया जाएगा। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम,माता सीता,लक्ष्मण और हनुमानजी की भूमिकाओं को देखने के लिए प्रतिवर्ष की भांति हजारों की भीड़ रोजाना उमड़ रही है।
मां दुर्गा की स्थापना
दुर्गा पूजा समिति के प्रमुख अनिल मौर्या,पंकज पीडिया एवं मनीष नवैत ने बताया कि नवरात्र का प्रारंभ 22 सितंबर से हो गया है परंपरा के अनुसार,इसी रामलीला मैदान में मां दुर्गा पूजा समिति द्वारा मां दुर्गा सहित नौ देवियों की स्थापना की गई है।भव्य पंडाल को कलकत्ता के कुशल कारीगरों द्वारा सजाया गया है,जो मां दुर्गा सहित सभी प्रतिमाओं और पंडाल को आकर्षक रूप दिए हैं। पूरे नवरात्रि उत्सव के दौरान श्रद्धालु यहां माता रानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। मां दुर्गा का विसर्जन भी 2 अक्टूबर को विजयदशमी दशहरे के दिन धूमधाम से किया जाएगा।
दशहरा मेला बना आकर्षण का केंद्र
कैमोर का दशहरा मेला वर्षों से आसपास के जिलों और गांवों के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता आ रहा है, जिसमें घरेलू सामग्री के स्टॉल सजे हैं।विभिन्न प्रकार के बड़े छोटे झूले सहित मनोरंजन के अन्य साधन,खानपान के विविध व्यंजन और दूसरे शहरों से आई दुकानों की रौनक मेले को विशेष बना रही है।
आतिशबाजी एवं रावण दहन की भव्यता
विजयदशमी की रात्रि 8 बजे 85 फुट ऊंचे विशाल रावण के पुतले का दहन आकर्षक इलेक्ट्रॉनिक तीर से किया जायेगा साथ ही आतिशबाजी से पूरा आकाश जगमगा उठेगा और लाखों की भीड़ इस अद्भुत दृश्य की गवाह बनती है। यह क्षण “असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक” बनकर लोगों के मन में ऊर्जा भर देता है।
मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
उक्त भव्य आयोजन को शांति और सुरक्षा के साथ संपन्न कराने के लिए मुख्य दशहरा उत्सव समिति की विभिन्न आयोजन समितियों सुरक्षा एजेंसियों व पुलिस प्रशासन द्वारा कड़े इंतजाम किए गए हैं, अदानी सुरक्षा चीफ ..
ने बताया कि रामलीला मैदान और झूला मैदान में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं,सुरक्षा गार्ड और बाउंसर तैनात किए हैं,कंट्रोल रूम और अस्थाई पुलिस चौकी भी रामलीला मैदान में बनाई गई है जहां पुलिस बल तैनात रहता है अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया है,साथ ही रावण के पुतले के चारों ओर बेरिकेटिंग की गई है ताकि दर्शक सुरक्षित दूरी से ही रावण दहन और आतिशबाजी का आनंद उठा सकें।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला
27 दिसंबर को छेत्रीय विधायक संजय सतेंद्र पाठक के सौजन्य से जबलपुर का प्रसिद्ध मनीष अग्रवाल देवी जागरण मंडल द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा, दशहरे के बाद भी रामलीला मैदान में उत्सव का रंग जारी रहता है।समिति के आशीष सिंह ने बताया कि इस वर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में दिनांक 3 अक्टूबर को स्थानीय कलाकारों द्वारा अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जायेगा। 4 अक्टूबर को जबलपुर की प्रसिद्ध एम पी इवेंट एंड म्यूजिकल ग्रुप (आर्केस्ट्रा)5 अक्टूबर को अखिल भारतीय कवि कवि सम्मेलन में कवियों की प्रस्तुतियां लोगों को रात देर तक बांधे रखेंगी कवि सम्मेलन में देशभर से मशहूर अंतरास्ट्रीय कवि प्रताप फौजदार,मुन्ना बैटरी मंदसौर,अतुल ज्वाला इंदौर,पंकज प्रसून मांडव और सुप्रसिद्ध श्रृंगार रस कवित्री सुश्री प्रेरणा ठाकरे अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित करेंगे।।साथ ही वहीं लकी ड्रा का भी आयोजन होगा।
ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक आकर्षण का संगम
कैमोर का ऐतिहासिक दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव भी है। यहां की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है और आधुनिकता के दौर में भी इसकी महत्ता बनी हुई है। रावण दहन और रामलीला देखने न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि आसपास के शहरों और गांवों से हजारों नागरिक प्रतिदिन आते हैं तथा दशहरे वाले दिन विशाल रावण के पुतले के दहन को देखने लगभग 1 लाख तक जन सैलाब उमड़ता है।
