जबलपुर: कोविड-19 महामारी के दौरान सेवा प्रदान करते हुए पति की मौत हो गयी थी। सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत अप्रात्र माने हुए विधवा पत्नी के आवेदन निरस्त कर दिया गया था। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने एकलपीठ ने आवेदन निरस्त किये जाने के आदेश को खारिज करते हुए आवेदिका को 90 दिनों में योजना का लाभ प्रदान करने आदेश जारी किये है।
जबलपुर निवासी अंजू मूर्ति उपाध्याय की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उसके पति कलेक्ट्रेट कार्यालय के प्रोटोकॉल विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर स्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी ड्यूटी प्रवासी मजदूरों के लिए बसों और एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए लगाई गई थी। इस दौरान उन्हें जून माह में हार्ट अटैक आया था और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गयी गयी थी।
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार के द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान समाज की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले कोरोना योद्धा के परिवारों को मुआवजा प्रदान करने के संबंध में 17 अप्रैल 2020 को परिपत्र जारी किया। परिपत्र में 23 अप्रैल को संशोधन करते हुए कहा गया था कि कर्मचारी कोविड-19 महामारी के दौरान कोविड योद्धा के रूप में कार्य कर रहा है तो उसके कोविड पीड़ित होने के संबंध में रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है।
याचिका में कहा गया था कि योजना का लाभ प्रदान करने की सिफारिश करते हुए जिला कलेक्टर ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था। राज्य सरकार ने उसके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृतक कर्मचारी का कोविड पॉजिटिव होने का कोई सर्टिफिकेट नही है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि योजना के तहत कोविड योद्धा के रूप कार्यरत कर्मचारी को कोविड पीड़ित होने के संबंध में रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। सरकार के द्वारा आवेदन निरस्त किये आने का आदेश गलत है। याचिकाकर्ता को 90 दिनों में योजना का लाभ प्रदान किया जाये।
