ब्यावरा: सरकार द्वारा किसानों को सोयाबीन फसल में भावांतर योजना का लाभ देने की घोषणा की है किंतु इसका लाभ 1 नवंबर से दिए जाने के कारण हजारों किसान इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे. क्योंकि खाद-बीज, त्यौहारों के चलते अभी पैसों की जरुरत है और किसान मंडी में सोयाबीन बेचने पहुंच रहे है ऐसे में भावांतर लागू होने के पूर्व ही हजारों किसान अपनी फसल बेच चुके होंगे.
विदित है कि प्रदेश सरकार द्वारा सोयाबीन फसल को भावांतर योजना का लाभ देने की घोषणा की है. इसके लिए 1 नवंबर से 15 जनवरी 2026 तक सरकार द्वारा भावांतर योजना का लाभ किसानों को दिया जाएगा. इसके लिए 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक पंजीयन होंगे. ई उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन होंगे.
मूल्य के अंतर की भरपाई करेगी सरकार
भावांतर योजना के तहत सरकार द्वारा सोयाबीन के एमएसपी से कम मूल्य में सोयाबीन की बिक्री पर नुकसान की भरपाई की जाएगी. शासन द्वारा भावांतर योजना के तहत सोयाबीन का एमएसपी न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है. इस तरह मंडी में बेची फसल के मूल्य एवं भावांतर के निर्धारित मूल्य के बीच अंतर की राशि किसानों के खाते में 15 दिन के भीतर पहुंचाने की बात कही गई है.
इस योजना का लाभ लेने के लिए ई उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा.भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के प्रदेश अध्यक्ष राम जगदीश दांगी, ग्राम झरखेड़ा निवासी पूनमचंद वर्मा, कालीपीठ क्षेत्र के ग्राम कालीतलाई निवासी विष्णुजी, ग्राम माल्याहेड़ी निवासी पप्पूजी, केशर सिंह, भगवान सिंह पटेल, छगन सिंह, प्रेम नारायण दांगी, रामकिशन दांगी, कैलाश नारायण, कमल सिंह बना, सोमनाथ, राजेश दांगी, भारत सिंह, पर्वत सिंह, राधेश्याम लववंशी, मांगीलाल गोस्वामी, डा. बापूलाल लववंशी रामपुरिया सहित किसानों का कहना है कि भावांतर योजना में 1 नवंबर से खरीदी की जाएगी जब तक अधिकांश कृषकगण अपनी सोयाबीन मंडी में बेच चुके होंगे जिसके चलते वह भावांतर योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगे. भावांतर योजना में खरीदी जल्द से जल्द की जाये ताकि इसका अधिकाधिक लाभ किसानों को मिल सके.
सोयाबीन की आवक बड़ी
स्थानीय कृषि उपज मंडी में सोयाबीन की आवक एकाएक बड़ गई है. शनिवार को 4413 क्विंटल सोयाबीन की आवक रही. इसके पूर्व 24 सितम्बर को 2019, 18 सितम्बर को 945 एवं 17 सितम्बर को 884 क्विंटल ही सोयाबीन की आवक रही थी.