न्यूयॉर्क (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के मंच से ही उसकी तीखी आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया में “सात लड़ाइयां” खत्म करवाने में उन्हें इस निकाय से कोई मदद नहीं मिली और उन्हें इससे यहां मिला तो बस “एक खराब टेलीप्रॉम्प्टर” और बीच में ही बंद हो गया एस्केलेटर मिला।
श्री ट्रम्प ने कहा कि उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और खुद वह “अच्छी सेहत” में न होते तो दोनों ही आज गिर गये होते। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा की 80वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यह दावा दोहराया कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के सात महीने में सात युद्धों को समाप्त करने में मदद की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा ,”मैंने सात युद्ध समाप्त कराये और इनमें कई जगहों पर अनगिनत, हज़ारों लोग लगे हुए थे। इनमें कंबोडिया, थाईलैंड, कोसोवो और सर्बिया, कांगो और रवांडा का युद्ध शामिल था , जो एक बड़ा ही भयंकर और हिंसक युद्ध था। पाकिस्तान और भारत, इज़रायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, तथा आर्मेनिया और अज़रबैजान।”
उन्होंने कहा कि “किसी भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री या यूँ कहें कि किसी भी अन्य देश ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, और मैंने यह सिर्फ़ सात महीनों में कर दिखाया।” उन्होंने कहा कि युद्धों को समाप्त करने में मदद करना सम्मान की बात है, “यह बहुत बुरा है कि संयुक्त राष्ट्र के बजाय मुझे ये काम करने पड़े।” “और दुख की बात है कि सभी मामलों में, संयुक्त राष्ट्र ने किसी भी मामले में मदद करने की कोशिश तक नहीं की।”
उन्होंने आगे कहा मैंने सात युद्ध समाप्त किए, इन सभी देशों के नेताओं से बात की और समझौते को अंतिम रूप देने में मदद की पेशकश करने वाला संयुक्त राष्ट्र का फ़ोन तक नहीं आया।”
“संयुक्त राष्ट्र से मुझे बस एक एस्केलेटर मिला जो बीच में ही रुक गया। अगर प्रथम महिला (श्रीमती ट्रम्प) की सेहत ठीक नहीं होती, तो वे गिर जातीं।” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा “हम दोनों अच्छी हालत में हैं, हम डटे रहे।…और फिर एक टेलीप्रॉम्प्टर जो काम नहीं कर रहा था।” ‘हम डटे रहे’ वाली उनकी बात पर सभा कक्ष में लोगों की हंसी – ठहाके से गूंज उठा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा , “संयुक्त राष्ट्र से मुझे यही दो चीज़ें मिलीं… ख़राब एस्केलेटर और ख़राब टेलीप्रॉम्प्टर, मुझे एहसास हुआ कि संयुक्त राष्ट्र हमारे लिए नहीं था, संयुक्त राष्ट्र वहाँ था ही नहीं। “बातचीत के दौरान नहीं, और वे आसान नहीं थीं।” श्री ट्रम्प ने इस बात में सवाल उठाया, “और ऐसे में संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य क्या है।”
हालांकि,इसके बाद अपनी आलोचना को नरम करते हुए श्री ट्रम्प ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र में इतनी ज़बरदस्त क्षमता है, लेकिन यह उस पर खरा उतरने के आस-पास भी नहीं है। ऐसा लगता है कि वे बस एक बहुत ही कड़े शब्दों वाला पत्र लिखते हैं, और उस पत्र पर कभी अमल नहीं करते।”
उन्होंने कहा, “ये खोखले शब्द हैं और खोखले शब्दों से युद्ध हल नहीं होते। युद्धों का समाधान केवल कार्रवाई से होता है।”
बाद में ट्रुथ सोशल पर उन्होंने पोस्ट किया: “संयुक्त राष्ट्र के समक्ष बोलना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी। मेरा मानना है कि भाषण को बहुत सराहा गया। इसमें ऊर्जा और प्रवास/आव्रजन पर विशेष ध्यान दिया गया। मैं इस बारे में लंबे समय से बात कर रहा हूँ और यह फ़ोरम इन दो महत्वपूर्ण वक्तव्यों के लिहाज़ से सबसे बेहतरीन था।
“मुझे उम्मीद है कि हर कोई इसे देख पाएगा! जब हम मंच पर चढ़ रहे थे, तब टेलीप्रॉम्प्टर खराब हो गया था और एस्केलेटर अचानक रुक गया था, लेकिन इन दोनों घटनाओं ने शायद भाषण को और भी दिलचस्प बना दिया। संयुक्त राष्ट्र में बोलना हमेशा सम्मान की बात होती है, भले ही उनके उपकरण थोड़े खराब हों। अमेरिका को फिर से महान बनाएँ।”
