तीन मंजिला इमारत ढही: दो की मौत, पानी और चूहों से कमजोर हुई थी बिल्डिंग की नींव

इंदौर. सोमवार रात रानीपुरा कोष्टी मोहल्ला त्रासदी में तीन मंजिला मकान अचानक भरभराकर ढह गया. हादसे में 40 वर्षीय मुस्तकिम उर्फ बबलू और 18 वर्षीय अलीफा की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए. रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह तक जारी रहा. देर रात 3 बजे तक राहत दल ने लगातार मशक्कत कर मलबे से शव निकाले. अफवाहें रहीं कि कई लोग और दबे हो सकते हैं, लेकिन शुक्र है कि और किसी की जान नहीं गई.

अंधेरे में चला बचाव अभियान

हादसे के तुरंत बाद क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति सुरक्षा कारणों से बंद कर दी गई. इससे चारों ओर अंधेरा छा गया और राहत कार्य में दिक्कतें आने लगीं. बाद में फायर ब्रिगेड से हाई पावर सर्च लाइट मंगवाई गई, जिसके सहारे पूरी रात मलबा हटाने और लोगों को निकालने का काम किया गया।

मां से छिपाई गई संतानों की मौत

हादसे में जान गंवाने वाले मुस्तकिम और अलीफा की माताएं गंभीर बीमार हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, मुस्तकिम की मां सायदा दिल की मरीज हैं. इसी तरह अलीफा की मां भी अस्पताल में भर्ती हैं. दोनों परिवार अब तक मांओं से उनकी संतानों की मौत की खबर छिपाए हुए हैं. परिजन कहते हैं, उनकी तबीयत पहले से नाजुक है, ऐसे में यह सदमा झेल नहीं पाएंगी.

घर खाली करने की तैयारी थी

परिजनों का कहना है कि नाले के पानी और सीलन से घर काफी कमजोर हो गया था. निगम को शिकायत भी की थी, लेकिन हमेशा यही जवाब मिला कि “सरकारी काम है, समय लगेगा.” इसी वजह से परिवार घर खाली कर कहीं और शिफ्ट होने की तैयारी में था. किराए का मकान भी देख लिया गया था, लेकिन उससे पहले ही मौत बनकर यह हादसा सामने आ गया.

दावत में गए नौ लोग बच गए

इसी इमारत में रहने वाले मुस्तकिम के रिश्तेदारों का परिवार सोमवार रात खजराना में आयोजित एक दावत में गया हुआ था. यह संयोग रहा कि पूरा परिवार उस वक्त घर पर नहीं था, वरना जनहानि और बड़ी हो सकती थी. परिजन बताते हैं कि दावत से लौटते वक्त ही उन्हें घर गिरने की खबर मिली और वे सीधे मौके पर पहुंचे.

पत्नी को बचाने गया, खुद दब गया

मौके पर मौजूद गवाहों ने बताया कि फहीमुद्दीन अंसारी को लोगों ने पहले ही बाहर निकाल लिया था. लेकिन जब उन्हें पता चला कि पत्नी आफरीन का पैर मलबे में दबा हुआ है, तो वे दोबारा भीतर चले गए. तभी अचानक और मलबा गिरा और वहीं उनकी जान चली गई. पत्नी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया है, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी है.

संपत्ति विवाद और ढही इमारत

मकान में तीन भाई अपने-अपने परिवार के साथ रहते थे. बताया जाता है कि पिछले कई सालों से संपत्ति को लेकर भाइयों में विवाद चल रहा था. विवादित संपत्ति का ढांचा हादसे की भेंट चढ़ गया. मकान करीब 20 साल पुराना था, जिसकी नींव पानी भरने और चूहों के कारण काफी कमजोर हो चुकी थी.

पड़ोसियों का नुकसान भी हुआ

गिरती इमारत का हिस्सा पास की दुकान और बगल में खड़ी नई बाइक पर आ गिरा, बाइक पूरी तरह चकनाचूर हो गई. दुकान के भी हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए और हजारों का सामान मलबे तले दब गया.

प्रशासन ने रातभर संभाला मोर्चा

जैसे ही घटना की खबर मिली, कलेक्टर शिवम वर्मा, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव मौके पर पहुंच गए. तंग गलियों से पोकलेन मशीनें पहुंचाने में दिक्कतें आईं, कई बार संसाधन भी खराब हो गए, लेकिन प्रशासन ने तुरंत नए संसाधन बुलवाकर राहत कार्य तेज कराया. रातभर अधिकारी मौके पर डटे रहे और सुबह तक मलबा हटाने का काम चलता रहा. लोगों की सक्रिय मदद भी राहत अभियान की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई. स्थानीय लोग अपने कारखानों से गैस कटर और औजार लेकर पहुंचे, जिससे दबे हुए लोगों को निकालने में आसानी हुई. प्रशासन और जनता की इस संयुक्त कोशिश से कई जिंदगियां बच सकीं.

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