
राहतगढ़। बीना नदी के किनारे बनेनीघाट के पास मां शीतला का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.
मंदिर के पुजारी पंडित अरुण पांडे बबलू महाराज ने बताया कि इस मंदिर में विराजमान मां शीतला की प्रतिमा के दर्शन करने से श्रद्धालुओं को मां तीन रूप में दर्शन देती हैं, ऐसी मान्यता है कि मां की प्रतिमा
सुबह नौ वर्ष की कन्या के रूप में, दोपहर के समय युवा अवस्था में एवं शाम होते ही वृद्ध मां के रूप में दर्शन देती है. इस मंदिर के बारे में अनेक किवंदती शामिल है. कहा जाता है कि राहतगढ़
नगर के प्राचीन ऐतिहासिक किला के राजा भी मां शीतला के तीन रूपों के दर्शन करने के लिए इसी मंदिर में आते थे.
इनमें राजा दरकसिंह अपने किसी जरूरी कार्य एवं युद्ध जैसे विशेष कार्य करने से पहले शीतला माता के दर्शन करने जरूर आते थे, इसके बाद वह मां का आशीर्वाद लेकर जाते थे, इसी तरह राजा ज्वाला सिंह जिनका ओरछा सहित पूरे बुंदेलखंड में बोलबाला था. उन
पर मैहर वाली मां शारदा की विशेष कृपा थी, वह भी इस मंदिर में विराजमान मां शीतला के दर्शन करके अपने आप को धन्य समझते थे. नवरात्रि पर मां शीतला का श्रद्धालु नौ दिन तक बदल बदल कर विशेष श्रृंगार किया करते हैं. मातारानी को बदलते स्वरूप के अनुसार श्रंगार किया जाता है.
अब पहाड़ी पर स्थित मां शारदा के दरबार में नवरात्रि तक आस्था का सैलाब उमड़ेगा.
