नयी दिल्ली, 20 सितंबर (वार्ता) दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में जिस आईएसआईएस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था उसकी जाँच में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद पाँच आतंकियों से हुई गहन पूछताछ के आधार पर पुलिस टीमों ने झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और बेंगलुरु में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बरामद ठिकानों को आईएसआईएस के रिक्रूटमेंट कैंप और विस्फोटक फैक्ट्री बताया है। इन जगहों से मिले रसायन, हथियार, लैपटॉप और गुप्त दस्तावेज़ों से यह साफ हो गया है कि यह गिरोह सिर्फ साजिशें नहीं रच रहा था, बल्कि बड़े पैमाने पर हमले करने की ठोस तैयारी में जुटा था।
जांच में सबसे बड़ा खुलासा झारखंड की राजधानी रांची से हुआ। यहां अश्हर उर्फ दानिश नाम का आतंकी 2024 से तबारक लॉज में किरायेदार बनकर रह रहा था। बाहर से वह भले ही एसएससी की तैयारी करने वाला छात्र लगता था, लेकिन पुलिस ने पाया कि उसका कमरा विस्फोटक बनाने का अड्डा बन चुका था।
छापेमारी में पुलिस को एक किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट समेत कई खतरनाक रसायन, बम बनाने का सामान और गुप्त दस्तावेज़ मिले। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दानिश बम बनाने में माहिर था। उसने कबूल किया कि वह सोनरेखा नदी के किनारे जाकर बनाए गए विस्फोटकों का परीक्षण करता था। वह धमाके कर बमों की शक्ति की जाँच करता और फिर सबूत मिटाने के लिए उन्हें नदी में फेंक देता था।
स्पेशल सेल की जाँच में सामने आया कि दानिश सीधे पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर से जुड़ा था। उन्हें इंटरनेट के ज़रिए बम और विस्फोटक तैयार करने की ‘क्लास’ दी जाती थी।
गिरोह ने युवाओं की भर्ती, फंड जुटाने और आतंकी योजनाओं को साझा करने के लिए गुप्त संदेश सेवा पर “इंटर्नस इंटरव्यू–बिजनेस आइडिया” नाम का एक ग्रुप भी बनाया था। पूछताछ में पता चला कि दानिश ने इंटरनेट से ही ‘टीएटीपी’ जैसे खतरनाक बम बनाना सीखा और उसकी तस्वीरें अपने साथियों को भेजीं। उसने ऑनलाइन मंचों से चाकू और रसायन तक मंगाए थे।
जांच अधिकारियों का कहना है कि ये पाकिस्तान आधारित हैंडलर के निर्देश पर भारत में ‘खिलाफत’ स्थापित करने और ‘गजवा-ए-हिंद’ के तहत जिहाद छेड़ने की साजिश रच रहे थे।
इनका उद्देश्य भारत में बड़े हमले करना था। इनके निशाने पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े नेता थे। इसके साथ ही कुछ प्रमुख धार्मिक स्थल और वीवीआईपी भी उनकी हिट लिस्ट में शामिल थे।
दिल्ली पुलिस ने कुछ दिन पहले ही पाँच आतंकियों – अश्हर उर्फ दानिश, आफ़ताब कुरैशी, सुफियान अबूबकर खान, मोहम्मद हुज़ैफ़ यामन और कामरान कुरैशी को गिरफ्तार किया था। इन्हीं से हुई पूछताछ के बाद उपरोक्त ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिनमें विस्फोटक बनाने का सामान, लैपटॉप, मोबाइल, हथियार और कई डिजिटल दस्तावेज़ बरामद हुए।
स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,“छापेमारी से साफ हो गया है कि यह कोई साधारण गिरोह नहीं था। इनके पास बड़े हमले की पूरी तैयारी थी। बरामद डिजिटल डाटा की जाँच की जा रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।”
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी है। अब आतंकी केवल सीमा पार से घुसपैठ तक सीमित नहीं हैं। वे सोशल मीडिया और गुप्त मंचों के ज़रिए युवाओं को बरगला रहे हैं। किराए के छोटे-छोटे कमरे अब ‘बारूद घर’ बन रहे हैं, जिससे निपटने के लिए नई रणनीति की ज़रूरत है।

