नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) जापान की रेटिंग एजेंसी रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. (आर एंड आई) ने भारत की वित्तीय साख का दर्जा बीबीबी प्लस (स्थिर) कर दिया है।
आर एंड आई की आज जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि , मजबूत घेरलू मांग और सरकार की नीतियों को देखते हुए विदेशी ऋणों के लिए देश की संप्रभु वित्तीय साख को बीबीसी से बढ़ा कर बीबीबी प्लस (स्थिर) किया है।
आर एंड आई इस वर्ष भारत की विदेशी कर्ज के लिए वित्तीय साख बढ़ाने वाली तीसरी वैश्विक रेटिंग एजेंसी है। इससे पहले अगस्त में एस एंड पी ने अपने विश्लेषण में भारत की रेटिंग बीबीबी ऋणात्मक से निकाल कर बीबीबी श्रेणी में डाला है। इससे पहले मई में मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने भारत की रेटिंग को बीबीबी (निम्न) से बढ़ा कर ‘बीबीबी’ श्रेणी में डाला था।
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पाँच महीनों में भारत की साख को तीन संगठनों द्वारा ऊंचा बताया जाना उसकी मज़बूत और जुझारू वृहद आर्थिक बुनियाद और विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन के लिए बढ़ती वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दुनिया भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं में विश्वास रखती है।
आर एंड आई ने भारतीय अर्थव्यवस्था की आगे की संभावनाओं को “स्थिरतापूर्ण” माना है।
इसने कहा है कि भारत की रेटिंग उन्नत करने का उसका यह निर्णय इस बात पर आधारित है कि यह इस समय दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह देश को मिल रहे जनसांख्यिकीय (यूवा आबादी) के लाभांश, मज़बूत घरेलू माँग और सुदृढ़ सरकारी नीतियों पर आधारित है।
आरएंडआई ने अपनी रिपोर्ट में राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने की दिशा में सरकार की प्रगति का भी उल्लेख किया है। उसने है कि मजबूत कर राजस्व में वृद्धि और सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने से भारत की राजकोषीय स्थिति मजबूत हुई है और उच्च वृद्धि दर के साथ-साथ ऋण का संभालने योग्य स्तर पर है।
एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का चालू खाते का घाटा कम है , सेवाओं के व्यापार में भारत का व्यापार संतुलन पक्ष में है तथा भारतीयों की ओर बाहर से आने वाले धन- प्रेषणों में भी स्थिरता है। बाह्य ऋण और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात भी कम है जो विदेशी मुद्रा के पर्याप्तता अनुपात में परिलक्षित होता है। उसका मानना है कि ये सूचक संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाह्य दृष्टि से भी मजबूत है।
एजेंसी ने आगे कहा कि वित्तीय प्रणाली से जुड़े जोखिम सीमित बने हुए हैं। एजेंसी ने अपने बयान में कहा, “हालांकि सरकार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और सब्सिडी में कटौती से कर राजस्व में वृद्धि के कारण वह राजकोषीय घाटे को कम करने में सफल रही है।” एजेंसी ने अमेरिका द्वारा हाल ही में टैरिफ में की गई वृद्धि को एक जोखिम कारक के रूप में स्वीकार किया, हालाँकि, उसने देखा कि भारत की अमेरिकी निर्यात पर सीमित निर्भरता और घरेलू मांग-संचालित विकास मॉडल इस प्रभाव को सीमति करेंगे।
इसके अलावा, उसने यह भी कहा कि जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने से राजस्व में कमी आएगी, लेकिन निजी उपभोग को बढ़ावा देकर इस नकारात्मक प्रभाव की कुछ हद तक भरपाई की जा सकेगी।
एजेंसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन की नीतियों की भी प्रशंसा की, जिनका मुख्य उद्देश्य विदेशी निर्माताओं को भारत की ओर आकर्षित करना, बुनियादी ढाँचे का विकास करना, कारोबारी माहौल में सुधार के लिए कानूनी ढाँचे को संस्थागत बनाना, ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

