तेजस्वी की सीट पर दूसरे नेता के बैठने पर रोहिणी आचार्य की तीखी प्रतिक्रिया, सोशल मीडिया पर छिड़ी सियासत

पटना, 18 सितंबर (वार्ता) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की बिहार अधिकार यात्रा के दौरान विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की रथ (यात्रा बस) की अगली सीट पर किसी अन्य नेता के बैठने को लेकर पार्टी के भीतर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
इस घटना पर नेता प्रतिपक्ष श्री यादव की बहन और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी डॉ रोहिणी आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर दो पोस्ट साझा कर अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा है।
रोहिणी आचार्य ने अपनी मूल पोस्ट में लिखा है कि ‘वंचितों और समाज के आखिरी पायदान पर खड़े वर्ग- समूह को आगे लाना ही राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव जी के सामाजिक- आर्थिक न्याय के अभियान का मूल मकसद रहा है। इन तस्वीरों में समाज के इन्हीं तबके से आने वालों को आगे बैठे देखना सुखद अनुभूति है।‘
इस पोस्ट के साथ उन्होंने दो तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें राजद नेता शिवचंद्र राम और रेखा पासवान श्री यादव की यात्रा बस की अगली सीट पर बैठे नजर आ रहे हैं। यह संकेत साफ था कि रोहिणी उन नेताओं का समर्थन कर रही हैं, जो सामाजिक न्याय के प्रतीक माने जाते हैं।
हालांकि सियासी तापमान तब और चढ़ गया जब रोहिणी ने आलोक कुमार नामक व्यक्ति की एक तीखी पोस्ट को भी अपनी वॉल पर साझा किया, जिसमें अप्रत्यक्ष तौर पर राज्यसभा सांसद संजय यादव पर निशाना साधा गया है। पोस्ट में लिखा गया है कि, ‘फ्रंट सीट सदैव शीर्ष के नेता- नेतृत्वकर्ता के लिये चिन्हित होती है और उनकी अनुपस्थिति में किसी को उस सीट पर नहीं बैठना चाहिये। वैसे अगर कोई अपने को शीर्ष नेतृत्व से भी ऊपर समझ रहा है तो अलग बात है… पूरे बिहार के साथ- साथ हम सब तमाम लोग इस सीट पर लालू जी और तेजस्वी यादव को बैठे देखने के अभ्यस्त हैं। उनकी जगह कोई और बैठे, ये हमें कतई मंजूर नहीं है।‘
पोस्ट में बिना नाम लिये उन नेताओं को ‘ठकुरसुहाती करने वाले’ और ‘दूसरे दर्जे के व्यक्ति में तारणहार देखने वाले’ कहा गया है, जिससे साफ है कि यह टिप्पणी पार्टी के अंदर गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर खींचतान की ओर इशारा करती है।
हालांकि अभी तक राजद की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन रोहिणी आचार्य की टिप्पणी को पार्टी के भीतर एक वर्ग की असहमति और आंतरिक सत्ता संतुलन की ओर इशारा माना जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी ने सोशल मीडिया के ज़रिये पार्टी और परिवार से जुड़े मुद्दों पर अपनी खुलकर राय रखी हो।
तेजस्वी प्रसाद यादव की गैर- मौजूदगी में उनकी यात्रा बस की अग्रिम सीट (जो आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष या पार्टी प्रमुख के लिये आरक्षित मानी जाती है) पर किसी अन्य नेता के बैठने की तस्वीरें सामने आईं, जिससे यह मुद्दा उभरकर सामने आया है। इसी पर रोहिणी आचार्य ने प्रतिक्रिया दी, जिसे कई राजनीतिक जानकार ‘पार्टी लाइन से हटकर संदेश’ के रूप में देख रहे हैं।

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