भारत को भविष्योन्मुखी वैश्विक क्षमता केंद्रों का हब बनाने के लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत: सीतारमण

विशाखापत्तनम, 18 सितंबर (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि वैश्विक कारोबार के क्षमता केंद्रों (जीसीसी) में बारे में राज्यों के लिए आदर्श नियमावली का प्रकाशन उन्हें अपने प्रयासों को बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की स्पष्ट रूपरेखा प्रदान करता है।
उन्होंने देश को भविष्य के लिए तैयार जीसीसी केंद्र बनाने के लिए केंद्र सरकार, राज्यों, उद्योग संघों और वैश्विक कंपनियों के मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छोटे ओर मझौले शहरों में रहने की अच्छी सुविधा और अवसंरचनात्मक ढांचा विकसित कर उन्हें बड़े शहरों का विकल्प बनाया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने यहां उद्योग मंडल सीआईआई के जीसीसी कारोबार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार क्षमता निर्माण और पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरतों को पूरा करके इस प्रयास में राज्यों के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 2025 के बजट में सरकार ने उभरते टियर-2 शहरों में जीसीसी को बढ़ावा देने में राज्यों का मार्गदर्शन करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचे का प्रस्ताव रखा था। दुनिया के 50 प्रतिशत वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) भारत में होंगे और बाकी जो भारत के बाहर हैं, उनमें से 50 प्रतिशत का संचालन ज्यादातर भारतीयों द्वारा किया जायेगा, यह बात उन्हें पिछले साल जुलाई के केंद्रीय बजट से काफी पहले बतायी गयी थी।
कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी भी मौजूद थे।
वित्त मंत्री ने कहा कि अब लगभग दो साल बाद जीसीसी ने भारतीय रंग-रूप हासिल कर लिया है और यह उसी उम्मीद और गति के साथ चल रहा है। उन्होंने कहा, “केंद्र, राज्य, उद्योग संघ तथा वैश्विक कंपनियां – हम सब मिलकर काम करके यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भारत में जीसीसी क्षेत्र का विकास व्यापक आधार वाला और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहे।”
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इससे न केवल जीसीसी परिदृश्य में भारत के नेतृत्व को मजबूती मिलेगी, बल्कि नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी क्षेत्रीय विकास के नये अवसर भी पैदा होंगे जो अंततः 2047 तक विकसित भारत सपने को साकार करने में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता और मानव पूंजी विकास पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है।
वित्त मंत्री ने कहा, “भारत की जीसीसी कहानी एक परिवर्तनकारी यात्रा है। आज, ये केंद्र नवाचार केंद्र हैं, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दे रहे हैं, बौद्धिक संपदा और पेटेंट उत्पन्न कर रहे हैं और वैश्विक उद्यमों के लिए सतत विकास को सक्षम बना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि वैश्विक संगठनों को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करके, भारत में स्थापित जीसीसी दुनिया के जीसीसी केंद्र के रूप में देश की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने जीसीसी केंद्र के बारे में प्रभाव को अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए – राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय नीतियों में तालमेल और नीतिगत साधनों के अनुकूलतम उपयोग पर बल दिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक राज्य अपने अद्वितीय तुलनात्मक लाभ का लाभ उठा सके।
उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि छोटे मझौले शहरों को भी अच्छा रहने योग्य बनाया जाये और बुनियादी ढांचे वाले ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो ताकि वे उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में उभरने में सक्षम हो। इससे वहां वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सकेगा, कंपनियां पुनर्निवेश को प्रोत्साहित होंगी और उच्च-मूल्य वाले नवाचार और सेवा वितरण को बढ़ावा मिलेगा और कुल मिलाकर इस तरह टीयर-2 और टीयर-3 के शहर टियर-1 महानगरों का विश्वसनीय विकल्प बन सकेंगे।
क्षमता निर्माण और पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरतों को पूरा करके इस प्रयास में राज्यों के साथ साझेदारी करने के लिए केंद्र की प्रतिबद्ध को दोहराते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा कि बुनियादी ढांचे और रसद संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए गये हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद के 1.7 प्रतिशत के बराबर ही पूंजी निवेश हो रहा था जो 2024-25 में 3.2 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावी पूंजीगत व्यय जीडीपी के 4.1 प्रतिशत के बराबर हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के पूरक के रूप में, केंद्र ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के अंतर्गत 50-वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में 3.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है और पूंजीगत व्यय में वृद्धि को प्रोत्साहित किया है, जिसके परिणामस्वरूप 22 राज्यों ने अपने संसाधनों से पूंजीगत व्यय में 10 प्रतिशत अधिक की वृद्धि दर्ज की है।
वित्त मंत्री ने पिछले 11 वर्षों में बुनियादी अवसंरचना के विकास में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान 88 नये हवाई अड्डों का परिचालन शुरू किया गया, 31 हजार किलोमीटर नयी रेल पटरियां बिछाई गयी हैं, मेट्रो नेटवर्क का चार गुना से अधिक विस्तार हुआ है, बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गयी है और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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