
रीवा।विंध्य के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल एवं इकलौते सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लगातार मरीजो की संख्या बढ़ती जा रही है. हालत यह है कि बेड़ नसीब नही हो रहे है. स्ट्रेचर में मरीजो को रखना पड़ रहा है. कमोवेश यही हाल जिला चिकित्सालय का है, यहा भी बेड़ के लिये मारामारी है.
दरअसल मौसमी बीमारी एवं अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीज अस्पताल पहुंच रहे है. अकेले रीवा ही नही समूचे विंध्य क्षेत्र से उपचार के लिये मरीज आते है जिसके चलते बेड़ कम पड़ रहे है. कई ऐसे मरीज भी है जो बेड़ उपलब्ध न होने के कारण निजी नर्सिंग होम में पहुंचते है. हालाकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अति गंभीर मरीज को बेड़ उपलब्ध कराया जाता है. जब तक किसी नेता या आला अधिकारी की सिफारिस न हो तो इन दोनो अस्पताल में बेड़ मिलना लोहे के चना चबाना जैसा है. ओपीडी में लगभग दो हजार मरीज पहुंचते है, जिसमें दो से तीन सौ मरीज भर्ती होते है. पिछले दस दिनो में मरीजो की संख्या तेजी से बढ़ी है. संजय गांधी अस्पताल में ऐसा कोई वार्ड नही जहा मरीज कम हो, सभी बेड़ और प्राइवेट वार्ड फुल है. स्ट्रेचर पर लेटे हुए मरीज का उपचार होता है और सुपर अस्पताल में तो हालत यह है कि अगर कोई मरीज भर्ती होना चाहता है तो पर्ची कटाने के दौरान उसे मना कर दिया जाता है कि बेड़ नही है. ऐसे में पर्ची नही कटती और मरीज भर्ती नही हो पाता. यह बात और है कि प्रबंधन या किसी बड़े नेता की सिफारिस हो तो मरीज भर्ती हो जाता है और बेड़ भी मिल जाता है. सुपर अस्पताल में भी बेड़ फुल चल रहे है. बेड़ की कमी के चलते प्रतिदिन मरीज बगैर उपचार के यहा से लौट जाते है और निजी नर्सिंग होमो के शरण में पहुंचते है जहा लूट का धंधा शुरू होता है. सुपर अस्पताल के अधीक्षक डा0 अक्षय श्रीवास्तव का कहना है कि बेड़ की कमी है और मरीज ज्यादा है, व्यवस्था बना पाना मुश्किल होता है.
गंभीर मरीज को बेड़ की व्यवस्था कराई जाती है: अधीक्षक
संजय गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डा0 राहुल मिश्रा ने बताया कि इस समय मौसमी बीमारी के चलते मरीजो की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अस्पताल में बेड़ कम पड़ रहे है यह बात सही है. लेकिन अति गंभीर मरीज जब आता है तो उसके लिये बेड़ की व्यवस्था कराई जाती है. संजय गांधी अस्पताल में रीवा ही नही बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र से मरीज पहुंचते है. बेड़ को लेकर दिक्कते आती है पर हमारी कोशिश होती है कि अति गंभीर मरीज को बेड़ उपलब्ध कराया जाय.
