ईयू से 102 अतिरिक्त भारतीय समुद्री खाद्य इकाइयों को मिली मंजूरी

कोच्चि, 11 सितंबर (वार्ता) भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। यूरोपीय संघ (ईयू) ने निर्यात के लिए 102 अतिरिक्त मत्स्य प्रतिष्ठानों को मंजूरी दे दी है, जिससे अब देश में ईयू-लिस्टेड यूनिट की संख्या 604 पहुंच गई है।

यह विस्तार भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 67.8 अरब अमेरिकी डॉलर के समुद्री खाद्य बाजार में बड़ा हिस्सा देगा और इससे अमेरिका के आयात शुल्क संबंधी चुनौतियों में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह सफलता वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में उच्च स्तरीय बातचीत की एक श्रृंखला और समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) तथा निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) द्वारा समुद्री खाद्य श्रृंखला में खाद्य सुरक्षा और ट्रेसिबिलिटी मानदंडों को कड़ा बनाने में किए गए अथक प्रयासों के बाद मिली है।

इसे एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए एमपीईडीए के अध्यक्ष डी. वी. स्वामी ने कहा, “यह उपलब्धि खेत से लेकर फोर्क (कांटे वाला चम्मच) तक खाद्य सुरक्षा के उच्चतम मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिखाती है। यह एक बड़े बाधा को दूर करता है और हमारे निर्यातकों को दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी बाजारों में से एक में आगे बढ़ने का मौका देता है।”

यूरोप पहले से ही समुद्री खाद्य खरीदारों में इंडिया का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जिसने 2024-25 में 9,429.56 करोड़ रुपये मूल्य के 2.15 लाख टन समुद्री खाद्य खरीदे। बेल्जियम, स्पेन और इटली शीर्ष गंतव्य बने हुए हैं, जहां झींगा, कटलफिश और स्क्विड उत्पादों की लिस्ट में सबसे आगे हैं। फ्रोजन झींगा भारत का प्रमुख निर्यात बना हुआ है, जिससे पिछले वित्त वर्ष में देश की वैश्विक आय 62,408 करोड़ रुपये (7.45 अरब अमेरिकी डॉलर) रही।

तटीय राज्यों के निर्यातकों ने इस खबर का जोरदार स्वागत किया। गुजरात स्थित मयंक एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. मनोज शर्मा ने ट्वीट किया, “इस मंजूरी से निस्संदेह यूरोप में भारत के झींगा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पूरे उद्योग को लाभ होगा।” तूतीकोरिन स्थित आइलैंड एक्सपोर्ट्स के संतोष प्रभु ने इसे “एमपीईडीए और ईआईसी के निरंतर प्रयासों” का नतीजा बताया, जबकि कोलकाता के निर्यातक विजय गोपाल ने कहा कि यूरोपीय संघ की मंजूरी सही समय पर मिली है, जब कंपनियों को विविधीकरण के लिए अमेरिका में आयात शुल्क प्रेरित कर रहे थे।

यह समय भारत-ईएफटीए व्यापार समझौते के 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होने के साथ भी मेल खाता है, जो नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे बाजारों के लिए और भी दरवाजे खोल देगा। अधिकारियों और उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि नयी मंजूरियों से फ्रोजन सेफलोपोड्स, टूना और तैयार झींगा उत्पादों के मूल्यवर्धित निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत यूरोपीय संघ के समुद्री खाद्य बाजार में अपनी मामूली 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा।

यह भारत के समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए महज एक स्वीकृति से कहीं अधिक है। यह उच्च मूल्य वाले बाजारों में गहरी पैठ, वैश्विक प्रतिकूलताओं के प्रति बेहतर लचीलापन और भारतीय समुद्री उत्पादों के लिए मजबूत वैश्विक ब्रांडिंग का वादा करने वाला अवसर है।

 

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