वैश्विक सैन्य बजट के 10 प्रतिशत में दूर हो सकती है दुनिया की गरीबी: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र, 09 सितंबर (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को कहा कि दुनिया के देश अपने सैन्य बजट पर जितना खर्च करते हैं उसके मात्र 10 प्रतिशत में दुनिया से भीषण गरीबी को समाप्त किया जा सकता है।

सैन्य खर्च और सतत एवं शांतिपूर्ण भविष्य पर आज यहां जारी संयुक्त राष्ट्र महासचिव की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2024 में दुनिया का सैन्य बजट 2,700 अरब डॉलर रहा जबकि दुनिया से भीषण गरीबी को दूर करने के लिए हर साल मात्र 230 से 280 अरब डॉलर (लगभग 10 प्रतिशत) की जरूरत है। दुनिया से भुखमरी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए हर साल 93 अरब डॉलर की जरूरत है जो सैन्य खर्च का महज 3.5 प्रतिशत है।

उल्लेखनीय है कि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2024 में दुनिया के देशों ने अपने सैन्य बजट पर 2,700 अरब डॉलर खर्च किये जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। साथ ही यह 2023 की तुलना में नौ प्रतिशत अधिक है। शीत युद्ध के बात से कभी सैन्य बजट में इतनी तेज वृद्धि नहीं देखी गयी थी।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि मूलभूत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों के लिए अपनी सेना पर खर्च करना जरूरी है, लेकिन दीर्घावधि में शांति एवं सुरक्षा के लिए सतत विकास, इंसानों की बेहतरी और देशों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों में निवेश सबसे महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट में सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में वित्तीय कमियों और सैन्य खर्च की तुलना की गयी है। इसमें कहा गया है कि पिछले 10 साल में दुनिया ने 21,900 अरब डॉलर खर्च किये जबकि इसके पांच प्रतिशत यानि एक लाख करोड़ डॉलर में दुनिया से अगले 10 साल तक बाल कुपोषण को समाप्त किया जा सकता है।

कम एवं मध्यम आय वाले 140 देशों में सभी को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए वैश्विक सैन्य बजट का 14 प्रतिशत और पानी तथा स्वच्छता मुहैया कराने के लिए उसका पांच प्रतिशत ही काफी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सैन्य खर्च में तेज वृद्धि से देश का आर्थिक विकास सुस्त पड़ जाता है। यह देशों पर ऋण का एक बड़ा कारण है। सेना का आकार बढ़ाना हिंसा की संस्कृति को जन्म दे सकता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।

इस रिपोर्ट में विकसित देशों को भी निशाना बनाते हुये कहा गया है कि दुनिया के सबसे अमीर देश जितना जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए गरीब देशों को पैसा देते हैं उससे 30 गुणा अपनी सेना पर खर्च करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यदि इसी रफ्तार से दुनिया के देश अपना सैन्य खर्च बढ़ाते रहे तो साल 2030 तक वैश्विक सैन्य बजट 3,500 अरब डॉलर और 2035 तक 4,700 अरब डॉलर हो जायेगा। इसकी भी संभावना है कि साल 2035 तक यह 6,600 अरब डॉलर पर भी पहुंच सकता है।

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