हाईवे पर नियमों का खुलेआम माखौल, दस मीटर की पाबंदी में खड़े पेट्रोल पंप व व्यवसायिक भवन

मंडला। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के स्पष्ट निर्देश हैं कि नेशनल हाइवे से 10 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है और 40 मीटर की सीमा में निर्माण के लिए कलेक्टर कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद एनएच-30 पर मंडला जिले के बरेला से लेकर चिल्पी तक बेतहाशा व्यावसायिक भवन, पेट्रोल पंप, ढाबा, रेस्टॉरेंट, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और यहां तक कि कॉलोनियां तक खड़ी कर दी गई हैं।

इन निर्माणों को बाकायदा अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) तक जारी कर दिया गया। नतीजा यह कि आज हाईवे के किनारे अवैध कारोबार फल-फूल रहे हैं और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है।

भारी वाहन बन रहे मौत का सबब:

हाईवे किनारे खुले ढाबों और रेस्टॉरेंट में रुकने वाले भारी वाहन सड़कों पर ही 24 घंटे तक खड़े रहते हैं। कई बार आधा दर्जन से अधिक ट्रक-ट्रेलर एक ही जगह कतार में खड़े मिलते हैं। यही वाहन अचानक पीछे से आने वाले लोडेड ट्रकों से भिड़कर दर्जनों जानें निगल चुके हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन और NHAI अधिकारियों ने अब तक इसे रोकने का प्रयास नहीं किया हैं।

नियमों का हवाला लेकिन पालन शून्य:

राष्ट्रीय भूमि और यातायात नियंत्रण अधिनियम 2002 तथा राजमार्ग प्रशासन नियम 2004 में साफ प्रावधान है कि 10 मीटर तक किसी तरह का निर्माण प्रतिबंधित।

40 मीटर की सीमा में निर्माण हेतु कलेक्टर कार्यालय से अनुमति अनिवार्य।

लेकिन मंडला जिले में इन नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में हाइवे से सटे अनाधिकृत भवन तेजी से खड़े हो रहे हैं।

सवाल उठता है कि आखिर इन नियमों का पालन कौन करवाएगा जिला प्रशासन, राजस्व अमला या खुद NHAI?

प्रदेश स्तर पर यह मुद्दा अब केवल स्थानीय नहीं रहा। यह कानून की धज्जियां उड़ाने और जनसुरक्षा से खिलवाड़ करने का गंभीर मामला है।

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