क्षमा याचना के साथ पर्युषण पर्व का समापन

सौसर।रविवार को जैन समाज द्वारा पर्युषण पर्व का समापन क्षमा याचना के साथ किया गया। नगर के सिविल लाइन स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह श्रीजी का अभिषेक पूजन एवं क्षमावाणी पूजा संपन्न हुई। इसके उपरांत समाज बंधुओं ने एक-दूसरे से “मिच्छामि दुक्कडम्” कहते हुए जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी और क्षमा प्रदान की।

आत्मशुद्धि और धर्म – कर्म को समर्पित है पर्युषण पर्व – यूसी जैन

मंदिर अध्यक्ष यू.सी. जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि और धर्म-कर्म को समर्पित है। दशलक्षण पर्व के रूप में मनाए जाने वाले इन दस दिनों में प्रत्येक दिन एक धर्म का पालन कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया जाता है। अंतिम दिन क्षमावाणी पर्व, राग-द्वेष और अहंकार को त्याग कर सच्चे क्षमाभाव को अपनाने का अवसर प्रदान करता है।

नगर में निकली भव्य शोभायात्रा

पर्व के समापन अवसर पर रविवार सुबह 7:30 बजे सकल जैन समाज द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा सिविल लाइन जैन मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गों में भवानी माता मंदिर, बस स्टैंड, बाजार चौक, विठ्ठल मंदिर, टॉकीज चौक से होती हुई पुनः जैन मंदिर में सम्पन्न हुई। इस दौरान पुरुष सफेद एवं महिलाएँ पीले वस्त्रों में पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं। जगह-जगह रथ पर सवार श्रीजी का स्वागत कर पूजा-अर्चना की गई। शोभायात्रा के दौरान नगर “अहिंसा परमो धर्म” और 24 तीर्थंकरों के जयकारों से गूंज उठा।

रात्रि में जैन धर्म का पवित्र ग्रंथ जिनवाणी का वाचन हुआ, जिसमें दशलक्षण धर्म—उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन्य और ब्रह्मचर्य—का महत्व विस्तार से बताया गया। साथ ही बच्चों द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएँ भी आकर्षण का केंद्र रहीं इस अवसर पर समाज बंधुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सामूहिक श्रद्धा व उत्साह से पर्व को सफल बनाया।

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