उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पर सूतक और चंद्रग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होता, बाबा महाकाल सभी नकारात्मक शक्तियों से परे हैं. 7-8 सितंबर की रात लगने वाले चंद्रग्रहण के दौरान महाकाल मंदिर में दर्शन पूर्ववत रहेंगे, केवल आरती और अन्नक्षेत्र की व्यवस्था में बदलाव किया गया है. शयन आरती समय से पहले संपन्न होगी और ग्रहण काल में मंदिर के पट बंद रहेंगे.
काल भैरव मंदिर में सूतक लगते ही मदिरा का भोग बंद हो जाएगा और गर्भगृह में प्रवेश निषेध रहेगा. ग्रहण उपरांत मंदिर का शुद्धिकरण कर पुनः पूजन-अर्चन होगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भारत में यह ग्रहण सकारात्मक वातावरण लाएगा जबकि विदेशों में विपरीत असर दिखेगा. उज्जैन में इसे साधना, जप और दान के लिए शुभ समय माना जाता है. सूतक काल में भोजन व अन्न से परहेज, स्नान-ध्यान और भजन-कीर्तन को विशेष फलदायी बताया गया है.
